यूपी में स्मार्ट मीटर घोटाला! 6.22 लाख पुराने मीटर जीरो रीडिंग पर, बिजली विभाग को करोड़ों का नुकसान
यूपी में स्मार्ट मीटर घोटाला! 6.22 लाख पुराने मीटर जीरो रीडिंग पर, बिजली विभाग को करोड़ों का नुकसान
लखनऊ (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों पर बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि कंपनियों ने 6.22 लाख पुराने मीटर विद्युत वितरण कंपनियों को जमा नहीं किए, जिससे बिजली विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। मामले का खुलासा होने के बाद सीतापुर में एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि गोंडा और बलरामपुर में भी मुकदमे दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।
गोंडा में जीरो रीडिंग का खेल
गोंडा जिले में जांच में पाया गया कि मीटर रीडिंग को जानबूझकर शून्य कर दिया गया, जिससे विभाग का भारी नुकसान हुआ। आशंका जताई जा रही है कि लाखों उपभोक्ताओं की बिजली खपत की असली रीडिंग मिटा दी गई है।
परिषद ने जताई मिलीभगत की आशंका
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मीटर कंपनियों और विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह साजिश रची गई है।
वर्मा ने आरोप लगाया, “मीटरों के डिस्प्ले को नुकसान पहुंचाकर रीडिंग मिटाई जा रही है। इससे न सिर्फ विभाग की राजस्व प्रणाली चरमरा रही है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी गलत बिलिंग का खतरा है।”
जांच तेज, दोषियों पर कार्रवाई तय
ऊर्जा विभाग के सूत्रों के मुताबिक कंपनियों से जवाब-तलब किया गया है और उनके रिकॉर्ड की जांच शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पारदर्शी जांच की मांग
परिषद ने मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। साथ ही सरकार से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और पुराने मीटरों की रिकवरी सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
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