यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल: सुनील आचार्य ने पीएम और रेल मंत्री को लिखी चिट्ठी, सख्त कार्रवाई की मांग
गुना (आरएनआई) भारतीय रेल को देश की “जीवनरेखा” कहा जाता है, लेकिन हाल के दिनों में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत जबलपुर स्टेशन और ट्रेनों में घटित घटनाओं ने आम यात्रियों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है।
गुना निवासी सुनील आचार्य, जो रेलवे के क्षेत्रीय परामर्शदात्री सदस्य भी रह चुके हैं, ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेल बोर्ड अध्यक्ष, पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एवं भोपाल मंडल रेल प्रबंधक को एक विस्तृत पत्र भेजा है।
पत्र में उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा, खाद्य पदार्थों की घटिया गुणवत्ता और रेलवे अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी आपत्ति जताई है। सुनील आचार्य ने लिखा है कि “हाल ही में जबलपुर स्टेशन पर एक बेंडर द्वारा यात्री से गाली-गलौच कर घड़ी उतरवाने और चलती ट्रेन में चढ़ने के लिए मजबूर करने की घटना घटी, जबकि कुछ ही समय बाद चलती ट्रेन में एक जवान को अटेंडर ने चादर मांगने पर गंदा चादर कहने पर कहां सुनी पर चाकू मारकर हत्या कर दी। ये घटनाएँ अत्यंत दर्दनाक हैं और रेलवे प्रशासन की नाकामी को उजागर करती हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रेलवे को आधुनिक बना रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर रेल अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यात्रियों को न तो सुरक्षा मिल रही है और न ही सम्मान।
मुख्य शिकायतें और सुझाव
स्टेशन व ट्रेनों में अवैध वेंडरों की मनमानी।
घटिया क्वालिटी के खाद्य पदार्थ निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेचे जा रहे हैं।
कोमार्शियल DCI,S.S,,H.I. ,TTE और स्टेशन मास्टर की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित। एंव अवैध बेंडर, घटिया क्वालिटी के खाद्य व पेय पदार्थ अधिकभार से विक्रय किये जा रहे है इन सब संबंधित अधिकारियो की मौजूदगी ये सब बताते है की भृष्टता की चरम शीमा मे संलिप्त है और यात्री हर तरफ से परेशान होकर लूट रहा है मर रहा है।
ट्रेनों में अटेंडरों द्वारा यात्रियों से अभद्रता और हिंसक घटनाएँ।
उन्होंने मांग की है कि—
सभी ठेकेदारों और कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
किसी भी घटना की स्थिति में ड्यूटी पर मौजूद अधिकारी की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जाए।
स्वतंत्र मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जाए, जिसमें सामाजिक प्रतिनिधि और रेलवे अधिकारी शामिल हों।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का नियमित निरीक्षण और मूल्य सूची स्टेशन पर सार्वजनिक की जाए।
सुनील आचार्य ने कहा कि, “रेलवे यात्रा आज आम नागरिक की जरूरत है, लेकिन यदि सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता नहीं सुधरी तो जनता का विश्वास डगमगा जाएगा। सरकार को अब कठोर कदम उठाने होंगे।” पत्र की एक प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय, रेल मंत्रालय, रेल बोर्ड अध्यक्ष, पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और भोपाल मंडल रेल प्रबंधक को भेजी गई है।
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