‘मुर्दों’ के नाम पर बिक रही थीं गोलियां: पूर्णिया के गन हाउस से कारतूस स्कैम का खुलासा
पटना STF ने कारतूस की खरीद-बिक्री करने वाले पांच अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में हाजीपुर रेल थाने में FIR दर्ज की गई है। वहीं STF ने जब सभी अपराधियों से पूछताछ की तो पता चला कि 50 राउंड 8 एमएम की गोली पूर्णिया के विशाल गन हाउस से खरीदी गई थीं, जिसके बाद इस गन हाउस पर छापेमारी की गई।
हाजीपुर (आरएनआई) बिहार में पिछले 15 दिन में करीब 50 मर्डर हुए। इनमें से अधिकतर लोगों को गोलियों से भूना गया। किसी को राजधानी पटना के नामचीन हॉस्पिटल में मारा गया तो किसी को राह चलते शूट कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठने लगा कि आखिर इतनी गोलियां (कारतूस) बिक कहां रही हैं, जो आए दिन किसी न किसी के शरीर को छलनी कर रही हैं। पुलिस की जांच में एक ऐसे गन हाउस का खुलासा हुआ, जो चल तो सरकारी लाइसेंस पर रहा था, लेकिन गोलियां ‘मुर्दों’ को बेच रहा था। बकायदा मुर्दों के नाम एंट्री होती, उनके साइन होते और ले कोई और जाता। जांच में खुलासा हुआ कि गन हाउस से कारतूस लेने के बाद उनकी तस्करी हो रही थी। अपराधियों के पास इनको पहुंचाया जा रहा था। हो सकता है कि इन्हीं गोलियों से अपराधी दिनदहाड़े हत्या की वारदात को अंजाम दे रहे हों।
ये विशाल नाम का गन हाउस पूर्णिया जिले में है। मंगलवार यानी आज मजिस्ट्रेट की निगरानी में विशाल गन हाऊस को सील कर दिया गया। पूर्णियां SP स्वीटी सहरावत ने इस गन हाउस के लाइसेंस को रद्द करने को लेकर DM अंशुल कुमार को लेटर भी भेज दिया। कलाभवन रोड स्थित विशाल गन हाउस द्वारा काफी लंबे समय से कारतूस की हेराफेरी कर उसको बेचा जा रहा था। मृत व्यक्ति के नाम से कारतूस लेकर उसकी अपराधियों को सप्लाई की जा रही थी।
इसका खुलासा तब हुआ, जब पटना STF ने हाजीपुर रेलवे स्टेशन से पांच कारतूस तस्करों को पकड़ा था, जो अपराधियों को कारतूस की सप्लाई देने आए थे। इन्हीं से पूछताछ के बाद पटना STF ने पूर्णिया स्थित विशाल गन हाऊस पर छापेमारी की और स्टॉक रजिस्टर की जांच की। जांच में कई संदिध व्यक्तियों को कारतूस सप्लाई के सबूत मिले। साथ ही पता और मोबाइल नंबर में भी फर्जीवाड़ा किया गया था।
SP स्वीटी सहरावत ने जानकारी दी कि खगड़िया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कुम्हरचकी निवासी जगदीश प्रसाद निराला के नाम पर एक हथियार लाइसेंस था, जिनकी 2024 में मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद, इसी मृत व्यक्ति के लाइसेंस का उपयोग करके हाजीपुर के पांच युवक पूर्णिया के नगर निगम स्थित विशाल गन हाउस से अवैध तरीके से कारतूस खरीद रहे थे। इन लोगों को 3 दिनों में 3 बार कारतूस दिया गया था।
SP स्वीटी सहरावत के अनुसार, ये युवक 27, 28 और 29 जून को 315 बोर के कुल 90 कारतूस विशाल गन हाउस से खरीदकर बेचने के उद्देश्य से हाजीपुर ले जा रहे थे। इसी दौरान, पटना STF टीम ने हाजीपुर रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर से इन तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से अवैध कारतूस, आर्म्स लाइसेंस बुक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गईं। पुलिस इस पूरे मामले में गहनता से जांच कर रही है। आखिर ये कारतूस किसके आदेश पर और क्यों खरीदे जा रहे थे?
वहीं जब पूर्णिया पुलिस और पटना STF ने गन हाउस में इन बदमाशों द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया तो मोबाइल नंबर भी फर्जी निकला। नंबर झारखंड के किसी मजदूर के नाम पर दर्ज था। पुलिस अब विशाल गन हाउस के संचालक इंद्रजीत कुमार सिंह को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है, ताकि उससे पूछताछ किया जा सके कि और ऐसे कितने लोगों को कारतूस की सप्लाई की है, इसकी जानकारी ली जा सके।
पटना STF ने 11 जुलाई को कारतूस की खरीद-बिक्री करने वाले पांच अपराधियों को गिरफ्तार किया था। इस संबंध में हाजीपुर रेल थाने में FIR दर्ज की गई है। वहीं STF ने जब सभी अपराधियों से पूछताछ की तो पता चला कि 315 बोर के कुल 90 कारतूस पूर्णिया के विशाल गन हाउस से खरीदी गए थे, जिसके बाद पूर्णिया में यह कार्रवाई हुई।
सीमांचल में सिर्फ 3 गन हाऊस ही हैं, जिनमें एक कटिहार और 2 पूर्णिया में हैं। वहीं किशनगंज में एक भी गन हाऊस नहीं है। इन गन हाऊस में आवश्यकता के अनुसार जिस किसी के पास गन का लाइसेंस हैं, वे कारतूस खरीद सकते हैं। वही अपराधियों को भी अपराध कारित करने में गोलियों की आवश्यकता होती हैं, जिसे ऐसे गन हाऊस संचालक बैकडोर से उपलब्ध करवाते हैं।
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