पंजाब यूनिवर्सिटी की नई सीनेट की अधिसूचना पर फिलहाल रोक, केंद्र सरकार ने कहा—छात्रहित सर्वोपरि
नई दिल्ली (आरएनआई) केंद्र सरकार ने छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) की नई सीनेट से संबंधित 1 नवंबर 2025 को जारी राजपत्रित अधिसूचना को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि हालिया जारी नई सीनेट की अधिसूचना अभी लागू नहीं होगी। सरकार का कहना है कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे में सुधार से जुड़ी एक और अधिसूचना जारी होने के बाद ही इसे प्रभावी किया जाएगा। तब तक पंजाब विश्वविद्यालय का समूचा कामकाज 31 अक्टूबर की अधिसूचना से पहले की स्थिति के अनुसार ही चलता रहेगा।
भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों की समस्याओं को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने तत्काल हस्तक्षेप किया है। इस संबंध में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने पीयू छात्रसंघ अध्यक्ष और अन्य छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
केंद्र सरकार ने दोहराया कि वह पंजाब विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक मूल्यों, शैक्षणिक उत्कृष्टता और संस्थागत अखंडता को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी निर्णय पारदर्शिता, समावेशिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सिद्धांतों के अनुरूप लिए जाएंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि छात्र विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में हैं, इसलिए सुधार की हर पहल में उनकी राय को महत्व दिया जाएगा।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि छात्रों और विश्वविद्यालय के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त वित्तीय सहयोग जारी रहेगा। बैठक में छात्रों ने पीयू प्रशासन द्वारा हलफनामा हस्ताक्षर करवाने के मुद्दे को भी उठाया। इस पर मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने हलफनामा आदेश को वापस ले लिया। इसके अलावा, छात्राओं के लिए नए गर्ल्स हॉस्टल की मांग पर भी जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।
यह स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट को भंग नहीं किया है, क्योंकि उसका कार्यकाल पहले ही 31 अक्तूबर 2024 को समाप्त हो चुका था। ऐसे में पहले से भंग हो चुकी सीनेट को दोबारा भंग करने का प्रश्न ही नहीं उठता।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह निर्णय विश्वविद्यालय में स्थिरता बनाए रखने और छात्रहितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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