नाले से चिपक कर खड़े हो रहे बहुमंजिला भवन, नियमों की खुली धज्जियाँ — सवालों के घेरे में टी एंड सीपी और नगरीय निकाय

Aug 21, 2025 - 15:50
Aug 21, 2025 - 15:56
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नाले से चिपक कर खड़े हो रहे बहुमंजिला भवन, नियमों की खुली धज्जियाँ — सवालों के घेरे में टी एंड सीपी और नगरीय निकाय

गुना (आरएनआई) ये बहुमंजिला भवन नानाखेड़ी नाले से चिपक कर निर्माणाधीन है। टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमानुसार नाले के किनारों से 09 मीटर दूरी तक भवन निर्माण निषेध है।  सवाल ये है कि फिर भी ये भवन और ऐसे सैकड़ों भवन कैसे बनते चले गए। क्या अनुमति देने वाले अधिकारी भौतिक सत्यापन नहीं करते? अब ऐसे भवनों को तोड़ने की हिम्मत कौन दिखाएगा? फिलहाल तो इतनी क्षमता किसी में दिखाई नहीं देती। लेकिन ये भी सत्य है कि जब तक अवैध निर्माण बुलडोजर की चपेट में नहीं आएंगे तब तक रुकेंगे भी नहीं।

ऐसे में Collector Office Guna को निर्देश देना चाहिए कि भविष्य में भवन निर्माण अनुमति देते समय नगरीय निकाय और टी एंड सीपी विभाग को अनुमति पत्र में तीन शर्तें प्रमुखता से जोड़ना चाहिए। 
(1) कॉलोनी अवैध होने की दशा में भवन निर्माण अनुमति स्वतः ही शून्य होगी। 
(2) नाले के किनारों पर नाले की सीमा से 9 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण किए जाने पर यह अनुमति शून्य हो जावेगी।
(3) अनुमति में वर्णित शर्त में से किसी भी शर्त का उल्लंघन किए जाने पर अनुमति शून्य हो जाएगी।

फिलहाल तक नगरपालिका द्वारा स्वीकृत ले आउट पर निम्न शर्तों के अध्ययीन भवन निर्माण अनुमति प्रदान की जाती है। हालांकि इन सभी शर्तों का भी कोई पालन नहीं करता।

1. भवन की कुर्सी भू-धरातली से 2.5 फुट ऊँची रखी जावे।
2. प्रति कमरा दो रोशनदान (व्हेन्टीलेशन) प्रकाश एवं वायु संचार हेतु रखे जावें ।
3. भवन में लेट्रिन फ्लश सिस्टम व स्वयं की भूमि में टैंक बनाकर निर्माण किया जावे।
4. भवन निर्माण संबंधी कोई मटेरियल बिना स्वीकृति नगरपालिका भूमि में न डालें।
5. नजूल विभाग के.एन.ओ.सी. में वर्णित चतुर्सीमा में निर्माण किया जावे।
6. भवन निर्माण में म.प्र. नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 184 लगायत 193 का ध्यान रखा जावे।
7. अनुमति के विपरीत किया गया निर्माण कार्य अवैध माना जावेगा।
8. शासकीय अथवा नगरपालिका भूमि में सड़क, गली, नली, खुली, भूमि, गटर आदि पर किसी भी प्रकार सेअतिक्रमण कर तोड़े, छज्जे, गैलरी, बालकनी, गली, जीना व सेप्टिक टैंक आदि का निर्माण न करें।
9. निकासी पानी के निस्तार के लिये पक्की नालियाँ बनाई जावें तथा नालियों में डाउन पाईप लगाये जावें।
10. कार्य प्रारंभ करने के पूर्व ले-आउट नगरपालिका के समझ अधिकारी से चैक कराया जावे तथा कार्य पूर्ण होने पर चैक कराने के उपरांत ही उपयोग में लाया जावे।
11. यह अनुमति भवन भूमि संबंधी आपसी विवाद अथवा आपत्ति होने पर किसी प्रकार के स्वत्व संबंधी अधिकार प्रदान नहीं करेगी।
12. आपने जो नगरपालिका से विकास कार्य कराये जाने बावत् अनुबंध-पत्र संपादित किया है, उसका पूर्ण रूप से पालन किया जावे।
13. यह अनुमति-पत्र मात्र तीन वर्ष के लिये वैध रहेगा।
14. निर्माण कार्य भूमि-भवन के 60% भाग पर किया जावे 40% खुला रखा जावे ।
15. बिजली की हाईटेंशन लाइन के नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न करें ।
16. भवन में रैन वाटर, हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रावधान आवश्यक रूप से किया जावे।
17. भवन में भूकम्प रोधी रिंग आवश्यक रूप से लगाई जावें ।

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