दिव्य–भव्य कीर्तन की गूंज से गुंजायमान हुआ नर्मदेश्वर धाम, गुजीदेई में उमड़ा भक्ति का सागर
हरदोई। तहसील शाहाबाद क्षेत्र के ग्राम गुजीदेई स्थित निर्माणाधीन नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में शुक्रवार की रात्रि भक्ति, संगीत और आध्यात्मिकता का ऐसा दिव्य संगम साकार हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को अलौकिक ऊर्जा से भर दिया। मानो स्वयं महादेव की कृपा इस धाम पर अवतरित हो गई हो। पत्रकार लक्ष्मीकांत पाठक द्वारा सम्पन्न कराए गए इस पावन कीर्तन उत्सव में स्थानीय भक्तों के साथ दूर-दूर से आए श्रद्धालु भी शामिल हुए, जिनकी उपस्थिति से मंदिर परिसर किसी आध्यात्मिक महाकुंभ की तरह दीप्तिमान हो उठा।कार्यक्रम का शुभारंभ रामकिशोर गुप्ता की सुरीली वाणी से प्रस्तुत
“गाइए गणपति जगवंदन, शंकरसुवन भवानी नंदन…”की मंगलकारी स्तुति के साथ हुआ, जिसके साथ ही वातावरण में विघ्नहर्ता गणेश के जयकारे गूंज उठे। जैसे ही कीर्तन मंडली के प्रमुख उमेश चन्द्र त्रिवेदी ने मंच संभाला, उनकी आवाज में भक्ति की लहरें उमड़ पड़ीं। उन्होंने “बड़ी देर भई नंदलाला…” भजन गाते ही श्रोताओं को ऐसे भक्ति-भाव में डुबो दिया कि मानो ब्रजभूमि का सजीव दर्शन होने लगा हो।इसके बाद एक के बाद एक प्रस्तुत हुए भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।वरगदिया निवासी गिरिंद का “धनश्याम तेरे दर पर फरियाद हमारी है…” भजन मंदिर परिसर में ऐसी गूंज उठा कि अनेक भक्तों की आँखें अनायास ही नम हो गईं।परेली के नन्हेलाल सक्सेना द्वारा गाया गया केवट-प्रसंग आधारित “बिन पग धोये न चढ़ाएं नाव…” भजन हर श्रोता को राम-केवट की भक्ति और समर्पण की उस भावभूमि में ले गया, जहाँ केवल प्रेम और श्रद्धा ही शेष रह जाती है।सूरापुर निवासी शिशुपाल ने अपने उद्गार भरे स्वरों में “जो करुणाकर तुम्हारा व्रज में फिर अवतार हो जाये…” भजन प्रस्तुत किया, जिसकी करुणा से भरी तान ने वातावरण को पूर्णतः भावमय बना दिया।इसके साथ ही राजेश्वर परेली, रामकिशोर गुप्ता और कुलदीप बरगदिया ने भी अपने मधुर भजनों से भक्तों के मन को छू लिया। ढोलक पर कुलदीप व हारमोनियम पर महेश राजपूत बरगदिया की अनुपम संगत ने संगीत को और अधिक जीवंत, शक्तिशाली और दिव्य बना दिया।पूरे कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और अद्भुत क्षण तब आया जब मात्र 12 वर्षीय बालक अनमोल सक्सेना ने अपनी निश्छल वाणी में “संसार के लोगों से आशा न किया करना, जब कोई न हो अपना सियाराम जपा करना…” भजन गाया। उसकी निर्मल आवाज और भक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुति ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया। उपस्थित श्रद्धालु उसकी प्रतिभा और गहरी आध्यात्मिक समझ को देखकर दंग रह गए और उसे खूब सराहना मिली।इस भव्य आयोजन में सचिदानंद पाण्डेय, रमाकांत पाठक, ऋषिकांत, करुणाशंकर, आयुष, शरदेंदु, प्रच्छित, हिमांशू, अच्युत, प्रत्यूष पाठक सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे। उनकी सामूहिक उपस्थिति, हर भजन पर उठती ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ की गूंज तथा भक्ति से भरी ऊर्जा ने इस पूरी रात को अविस्मरणीय बना दिया। नर्मदेश्वर धाम का वातावरण देर रात तक भजनों, कीर्तन और भक्तिरस से यूँ ही गुंजायमान रहा, मानो पूरा गुजीदेई गाँव स्वयं आध्यात्मिक प्रकाश में
स्नान कर रहा हो।
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