थार से सौराष्ट्र तक गूंजा ‘त्रिशूल’: तीनों सेनाओं की जबरदस्त ताकत का प्रदर्शन, आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का परिचय
नई दिल्ली (आरएनआई) — थार के तपते रेगिस्तान से लेकर सौराष्ट्र के तटीय इलाकों तक भारत की तीनों सेनाएं—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—इन दिनों एक साथ अपनी युद्धक क्षमता और समन्वय का प्रदर्शन कर रही हैं। यह भव्य अभ्यास ‘त्रिशूल’ न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारियों की परीक्षा है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की रक्षा क्षमता का भी सशक्त प्रतीक बन गया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘त्रिशूल’ अभ्यास 30 अक्तूबर से जारी है और इसका अंतिम चरण 13 नवंबर को सौराष्ट्र तट पर होगा। इस दौरान तीनों सेनाएं संयुक्त एम्फीबियस (जल-थल आधारित) ऑपरेशन का प्रदर्शन करेंगी। अभ्यास का उद्देश्य है—भूमि, समुद्र, हवा, साइबर और डिजिटल क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की क्षमता का आकलन।
थार में ‘मरुज्वाला’ और ‘अखंड प्रहार’ जैसे अभ्यास
थार रेगिस्तान में साउदर्न कमांड की इकाइयां ‘मरुज्वाला’ और ‘अखंड प्रहार’ अभ्यासों के माध्यम से अपनी गतिशीलता, युद्धक रणनीति और मारक क्षमता की परख कर रही हैं। ये अभ्यास वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में किए जा रहे हैं ताकि सेना की प्रतिक्रिया और एकीकरण को परखा जा सके।
कच्छ में त्रि-सेवा समन्वय की मिसाल
कच्छ क्षेत्र में सेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल और सीमा सुरक्षा बल ने नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त अभ्यास किया। इस दौरान आपदा या युद्ध की स्थिति में त्वरित आपसी समन्वय और राहत अभियानों की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया गया।
सौराष्ट्र में होगा भव्य समापन
सौराष्ट्र तट पर अभ्यास का अंतिम चरण सबसे अहम माना जा रहा है। इस दौरान समुद्र तट पर उतराई (बीच लैंडिंग) का अभ्यास होगा, जिसमें सैनिक समुद्री मार्ग से तट पर उतरकर नियंत्रण स्थापित करने का प्रदर्शन करेंगे। वायुसेना ऊपर से कवर देगी और हेलीकॉप्टरों से सैनिकों व रसद की आवाजाही होगी।
‘दशक परिवर्तन’ योजना का हिस्सा
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ‘त्रिशूल’ अभ्यास भारतीय सेना की ‘दशक परिवर्तन योजना’ के तहत भी एक अहम कदम है, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच पूर्ण एकीकरण, नवाचार और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना है। यह अभ्यास न केवल भारत की रणनीतिक तैयारियों को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता को भी दर्शाता है।
‘त्रिशूल’ इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब हर क्षेत्र में—भूमि से लेकर आकाश और समुद्र तक—स्वावलंबन और शक्ति का पर्याय बन चुका है।
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