छात्रों को राहत: किराये के घर पर GST नहीं लगेगा; राज्य बार काउंसिलों में 30% महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
नई दिल्ली (आरएनआई) — सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी आवासीय संपत्ति को छात्रों या कामकाजी पेशेवरों के रहने के लिए हॉस्टल के रूप में लीज पर दिया जाता है, तो उस पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लागू नहीं होगा। अदालत ने कहा कि ऐसी संपत्तियों का मूल उपयोग आवासीय ही रहता है, इसलिए उन पर कर नहीं लगाया जा सकता।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि 18 प्रतिशत GST लगाने से छात्रों और युवा पेशेवरों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और आवासीय उपयोग पर दी गई कर छूट का उद्देश्य ही निष्फल हो जाएगा। यह मामला बेंगलुरु स्थित एक 42 कमरों की संपत्ति से जुड़ा है जिसे हॉस्टल के रूप में उपयोग किया जा रहा था।
इसी के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया कि आगामी राज्य बार काउंसिल चुनावों में महिलाओं के लिए कम से कम 30 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा कि महिला वकीलों को निर्णय-निर्माण में बराबर प्रतिनिधित्व मिलना समय की मांग है।
बीसीआई ने दलील दी कि इसके लिए अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता होगी और कई राज्यों में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उम्मीद जताई कि मौजूदा नियमों की व्याख्या इस तरह की जाए कि महिला आरक्षण लागू हो सके।
पीठ ने कहा कि यदि उचित अवसर दिया जाए, तो महिलाएँ बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ेंगी। अदालत ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यशाला का हवाला देते हुए बताया कि सर्वेक्षण में 83 प्रतिशत महिला वकीलों ने सदस्यता और चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी की इच्छा जताई है।
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