चक्रवात ‘सेंयार’ की आहट! तमिलनाडु–केरल में भारी बारिश का अलर्ट, मलक्का जलडमरूमध्य का गहरा दबाव बना खतरा
नई दिल्ली (आरएनआई)। नवंबर का महीना सामान्यतः बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की सक्रियता के लिए जाना जाता है और इस बार भी मौसम का मिज़ाज कुछ ऐसा ही दिख रहा है। इस समय समुद्री क्षेत्र में दो मजबूत मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं, जिनका असर दक्षिण भारत के कई राज्यों पर पड़ना तय माना जा रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य में बना गहरा दबाव तेजी से चक्रवात में बदल सकता है, जिसे बनने पर ‘सेंयार’ नाम दिया जाएगा—जिसका अर्थ है शेर, और यह नाम संयुक्त अरब अमीरात द्वारा सुझाया गया है।
आईएमडी के अनुसार, मलक्का जलडमरूमध्य में सक्रिय यह सिस्टम धीरे-धीरे एक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके प्रभाव से समुद्र में 60 से 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार वाली तेज हवाएं चलने की आशंका है, जो जहाजरानी और समुद्री गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। चूंकि यह क्षेत्र अंडमान सागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ता है, इसलिए इसका प्रभाव रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंडमान-निकोबार में तेज बारिश का अलर्ट
26 और 27 नवंबर को अंडमान-निकोबार में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। तेज हवाओं, समुद्र में उथल-पुथल और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। 28 नवंबर से मौसम में धीरे-धीरे सुधार की संभावना है, लेकिन तब तक स्थिति अस्थिर बनी रहेगी।
तमिलनाडु, केरल और दक्षिण भारत में असर तेज होगा
साथ ही बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से और दक्षिण श्रीलंका के पास एक और कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। यह भी आगे चलकर डिप्रेशन का रूप ले सकता है, जिससे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में बारिश बढ़ेगी।
तमिलनाडु के तूतीकोरिन सहित कई तटीय जिलों में पिछले 24 घंटों में भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे जलभराव और यातायात बाधित होने की स्थिति बनी। हालात को देखते हुए कई जिलों में मंगलवार को स्कूल और कॉलेज बंद रखे गए।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी कुछ दिनों तक दक्षिण भारत का मौसम पूरी तरह इसी दोहरी समुद्री गतिविधि के प्रभाव में रहेगा।
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