गुना बाढ़ का असली कारण बने अतिक्रमण, सिंधिया से मॉनिटरिंग की उठी मांग

बाढ़ का प्रमुख कारण नदी नालों की प्राकृतिक संरचना को खुर्दबुर्द कर उनके बहाव क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां काटना और नालों में दीवार या अन्य पक्की संरचना बनाकर और मिट्टी भरकर उन्हें संकरा कर देना है। जब तक ये अतिक्रमण नहीं हटेंगे, बाढ़ का सबसे प्रमुख कारण विद्यमान रहेगा।

Aug 20, 2025 - 14:43
Aug 20, 2025 - 14:48
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गुना बाढ़ का असली कारण बने अतिक्रमण, सिंधिया से मॉनिटरिंग की उठी मांग

गुना (आरएनआई) यदि खबर का ये दावा सच है तो फिर गुना के व्यापक हित के लिए लोकप्रिय सासंद ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को स्वयं इस विषय की मॉनिटरिंग करना चाहिए। कारण कि 29 जुलाई को आई बाढ़ से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावितों में नदी नालों पर अतिक्रमण करने के दोषियों के साथ साथ निर्दोष भी शामिल हैं। 

बाढ़ पीढ़ितों ने रोष जाहिर करने के लिए प्रदर्शन के दौरान शासन प्रशासन के विरुद्द मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं, लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी का पुतला तक दहन किया है। ये स्थिति भविष्य में दुबारा निर्मित न हो इसके लिए नदी नालों से अतिक्रमण हटना नितांत आवश्यक है।

ये तथ्य किसी से छुपा नहीं है कि बाढ़ का प्रमुख कारण नदी नालों की प्राकृतिक संरचना को खुर्दबुर्द कर उनके बहाव क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां काटना और नालों में दीवार या अन्य पक्की संरचना बनाकर और मिट्टी भरकर उन्हें संकरा कर देना है। जब तक ये अतिक्रमण नहीं हटेंगे, बाढ़ का सबसे प्रमुख कारण विद्यमान रहेगा।

यह भी सर्वविदित है कि, गुना के जमीन कारोबारी जब से भू माफिया बने, भूमाफिया यानी भू-कारोबारी + राजनेता + गुंडे + मनी इन्वेस्टर + भ्रष्ट अफसरों का सामूहिक गठजोड़। तो ऐसे माफिया ने "दिन बीस गुने रात पचास गुने" की गति से अवैध रीति से पैसा कूटा है। हालांकि इनका पैसा कमाना किसी को नहीं खटक रहा, भला इंसान पाप की कमाई का भागीदार बनेगा भी नहीं।

लेकिन, अवैध तरीके से अवैध कॉलोनियां बेच बेचकर सरकार और शहर में मानवता के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा करने वाले लोग भी यही हैं। यदि सारे अफसर सिर्फ एक महीने अपने अपने बच्चों की कसम खाकर ईमानदारी से भू माफिया के कुकर्मों की कुंडली खंगाल दें तो वनभूमि, तालाब की भूमि, राजस्व की भूमि, नदी और नालों की भूमि पर कहां कितना भेजा अतिक्रमण है सब सामने आ जाएगा। जहां इनका इनका "दांव" लगा वहां इन्होंने "बट्टा" लगाया है। 

भूमाफिया का सबसे बड़ा संरक्षण करने वाला घटक राजनेता ही होता है। वही अफसरों को प्रभावित करता है उन्हें न्याय, नीति, नियम और कानून के अनुसार काम करने से रोकता है। इसके एवज में ऐवजी राजनेता भूमाफिया से उपकृत होता है। राजनीति बड़ा महंगा शौक है। 

गुना के अनेक नेताओं के व्यापार तक लोगों को नहीं पता कि उनकी आय के असल साधन क्या हैं। जो साधन दिखाई देते हैं वो शानो शौकत के मुताबिक नगण्य हैं। जाहिर है कि यदि उनके इर्दगिर्द भू माफिया, खनिज माफिया, ऑन लाइन सट्टा माफिया दिखाई देते हैं और वो उनकी सिफारिश करते हैं तो आरोप तो लगेंगे ही। थाने में अपना थानेदार और कचहरी में अपना तहसीलदार बैठाने के पीछे भी कहीं न कहीं अनुचित को अपने हिसाब से हैंडल करने की सोच का हिस्सा होता है।

बहरहाल, प्रशासन की अतिक्रमण हटाने की इस मुहिम को हर आम और खास, पक्ष विपक्ष के ईमानदार लोगों का खुलकर समर्थन व सहयोग है। ऐसे में जो भी भू माफिया और अतिक्रमणकर्ता का समर्थन करेगा आमजन बुराई के डर से अभी भले ही चुप रहे, मौका आने पर एहसास जरूर कराएगी। भारत में जनता की चुप्पी चुनावों में असर दिखाती है।

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