एच-1B वीजा शुल्क बढ़ोतरी पर कांग्रेस का मोदी पर वार—'रणनीतिक चुप्पी' बोझ बनी
कांग्रेस ने एच-1 वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा हैं। गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि अब प्रधानमंत्री मोदी की “रणनीतिक चुप्पी” और 'शोर-शराबा' की प्राथमिकता भारत और उसके नागरिकों के राष्ट्रीय हित के लिए बोझ बन गई है।
नई दिल्ली (आरएनआई) अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एच-1 वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी ने मोदी को "कमजोर" प्रधानमंत्री करार देते हुए कहा कि उनकी "रणनीतिक चुप्पी" और "शोर-शराबे वाले दिखावे" अब बोझ बन गए हैं।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एच1-बी वीजा पर हाल के फैसले से अमेरिकी सरकार ने भारत के सर्वश्रेष्ठ और प्रतिभाशाली लोगों के भविष्य पर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि मुझे अभी भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का साहस याद है, जब अमेरिका में एक महिला आईएफएस राजनयिक का अपमान किया गया था। गोगोई ने आरोप लगाया कि अब प्रधानमंत्री मोदी की “रणनीतिक चुप्पी” और 'शोर-शराबा' की प्राथमिकता भारत और उसके नागरिकों के राष्ट्रीय हित के लिए बोझ बन गई है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट किया कि आठ साल बाद, राहुल गांधी एक बार फिर निर्दोष साबित हुए। उन्होंने गांधी के 2017 के एक पोस्ट को उन मीडिया रिपोर्टों के साथ टैग किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बातचीत में एच-1बी वीजा का मुद्दा नहीं उठा था। खेड़ा ने प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने 2017 में ही इस पर चिंता जताई थी और तब से कुछ भी नहीं बदला है। भारत अभी भी एक कमजोर प्रधानमंत्री के साथ फंसा हुआ है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत H-1B वीजा का वार्षिक शुल्क 1,00,000 अमेरिकी डॉलर कर दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि H-1B कार्यक्रम का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। घोषणापत्र में कुछ गैर-आप्रवासी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने और कंपनियों द्वारा अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों को भर्ती करने के लिए वीजा पर यह भारी शुल्क लगाने का प्रावधान है।
ट्रम्प ने घोषणापत्र में कहा कि एच-1बी गैर-आप्रवासी वीजा कार्यक्रम अस्थायी श्रमिकों को अमेरिका में लाने के लिए बनाया गया था, ताकि वे अतिरिक्त, उच्च-कुशल कार्य कर सकें, लेकिन इसका जानबूझकर शोषण किया गया है, ताकि अमेरिकी श्रमिकों की पूर्ति के बजाय, उन्हें कम वेतन वाले, कम-कुशल श्रमिकों से प्रतिस्थापित किया जा सके।
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