ईरान तनाव के बीच पश्चिम एशिया में अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती, सेंट्रल कमांड की पोस्ट से बढ़ी हलचल
वॉशिंगटन (आरएनआई)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पश्चिम एशिया में हलचल तेज कर दी है। पोस्ट में अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत और तैनाती का खुलासा किया है, जिसे विशेषज्ञ ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पश्चिम एशिया में तीन बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर—यूएसएस अब्राहम लिंकन, यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश—तैनात किए गए हैं। इनके साथ लगभग 200 लड़ाकू विमान भी तैनात हैं, जिनमें एफ-18, सुपर हॉर्नेट, एफ-35सी जैसे आधुनिक फाइटर जेट शामिल हैं। इसके अलावा ईए-18जी ग्रोलर जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान, हॉकआई अर्ली वार्निंग सिस्टम, सी हॉक हेलीकॉप्टर और सीएमवी ओस्प्रे जैसे लॉजिस्टिक विमान भी मौजूद हैं।
समुद्री ताकत को और मजबूत करने के लिए अमेरिका ने निमित्ज और फोर्ड क्लास के एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ कुल 12 युद्धक जहाजों की तैनाती की है, जिन पर करीब 15 हजार नाविक और मरीन्स मौजूद हैं। साल 2003 के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका ने पश्चिम एशिया में एक साथ तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, जिससे क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी बेहद मजबूत हो गई है।
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल युद्धविराम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बरकरार है। अमेरिका की इस तैनाती को संभावित खतरे के मद्देनजर दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कूटनीतिक स्तर पर शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं।
इसी बीच सैयद अब्बास अराघची पाकिस्तान के इस्लामाबाद दौरे पर हैं, जहां वे क्षेत्रीय हालात और अमेरिका-इजराइल के साथ तनाव को लेकर चर्चा करेंगे। जानकारी के अनुसार, वह पाकिस्तान, ओमान और रूस की यात्रा पर रहेंगे, जिसका उद्देश्य इन देशों के साथ तालमेल बढ़ाना और मौजूदा हालात पर विचार-विमर्श करना है। ईरान के सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे वार्ता की कोई योजना नहीं है और पाकिस्तान इस मामले में संपर्क माध्यम की भूमिका निभा सकता है।
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