सरकारी जमीनों व तालाबों पर अतिक्रमण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश — क्या हरदोई प्रशासन करेगा पालन?

Oct 17, 2025 - 11:13
Oct 17, 2025 - 11:16
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सरकारी जमीनों व तालाबों पर अतिक्रमण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश — क्या हरदोई प्रशासन करेगा पालन?

हरदोई (आरएनआई) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि राज्यभर में सार्वजनिक भूमि या सार्वजनिक उपयोगिता के लिए आरक्षित भूमि पर हुए सभी अतिक्रमण 90 दिनों के भीतर हटाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि इस काम में ग्राम प्रधान, लेखपाल और राजस्व अधिकारी किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें, अन्यथा उनके खिलाफ विभागीय व आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामसभा की भूमि पर कब्जा ‘आपराधिक विश्वासघात’
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने यह आदेश मनोज कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका में आरोप था कि मिर्जापुर के चुनार क्षेत्र के चौका गांव में ग्रामीणों ने तालाब पर अवैध कब्जा कर लिया है और शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।

कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “ग्रामसभा की भूमि से अतिक्रमण हटाने या उसकी सूचना देने में ग्राम प्रधान, लेखपाल और राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता ‘आपराधिक विश्वासघात’ के समान मानी जाएगी।”

क्या हरदोई का जिला प्रशासन करेगा आदेश का अनुपालन 
इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह आदेश पूरे उत्तर प्रदेश में लागू है ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या हरदोई जिला प्रशासन इसे  सख्ती से लागू करेगा हरदोई की शाहाबाद तहसील में दर्जनों ऐसे तालाब और सरकारी जमीनें हैं जिन पर वर्षों से ग्राम प्रधानों, उनके सगे-संबंधियों और प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर रखा है।

कई स्थानों पर इन तालाबों को पाटकर पक्के मकान, गोदाम और खेत बना दिए गए हैं, जिससे न केवल सार्वजनिक संसाधनों का नुकसान हुआ है, बल्कि ग्रामसभा की संपत्ति पर निजी कब्जों को बढ़ावा मिला है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या हरदोई के जिलाधिकारी अपने एसडीएम और तहसीलदार से हाईकोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में लेखपालों से वास्तविक रिपोर्ट मंगवाकर कार्रवाई करेंगे?क्या प्रधानों और उनके परिजनों द्वारा कब्जाई गई भूमि पर प्रशासन बिना भेदभाव कार्रवाई करेगा?
या फिर यह मामला भी स्थानीय दबाव और राजनीतिक प्रभाव के कारण “ठंडे बस्ते” में डाल दिया जाएगा?

पहले भी आए आदेश, मगर कार्रवाई नहीं

इससे पहले भी उच्चतम न्यायालय और उत्तर प्रदेश शासन ने सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने के कई निर्देश जारी किए हैं,
लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई नगण्य रही है।
कई गांवों में तालाबों पर पक्के मकान, चरागाहों में खेती और बंजर जमीनों पर कब्जे प्रशासन की निष्क्रियता की पोल खोलते हैं।

90 दिन की समयसीमा  प्रशासन की परीक्षा
हाईकोर्ट ने 90 दिन की सख्त समयसीमा तय की है। अगर इस अवधि में कार्रवाई नहीं हुई, तो एसडीएम, तहसीलदार और लेखपालों की जवाबदेही तय की जा सकती है। अब देखना यह है कि हरदोई प्रशासन इस आदेश को कितनी गंभीरता से लागू करता है।

या फिर एक बार यह आदेश सिर्फ कागजों में सीमित रह जाएगा, या वास्तव में सरकारी जमीनों को अतिक्रमणमुक्त की दिशा में एक सार्थक कदम बढ़ेगा। क्या सरकारी जमीनों पर अबैध कब्जों की रिपोर्ट दबाने वाले लेखपालों व प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि जनहित और जवाबदेही की कसौटी है।  अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हरदोई प्रशासन इस आदेश को न्याय की भावना के साथ लागू करता है या औपचारिकता तक सीमित रहता है। जनता की निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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Laxmi Kant Pathak Senior Journalist | State Secretary, U.P. Working Journalists Union (Regd.)