शीतकालीन सत्र में SIR पर गर्माया माहौल: राज्यसभा में हंगामा, लोकसभा स्थगित
नई दिल्ली (आरएनआई)। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामे के बीच हुई, जहां 12 राज्यों में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का मुद्दा संसद से सड़क तक छाया रहा। सरकार 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में एटॉमिक एनर्जी समेत दस नए विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है, लेकिन पहले ही दिन लोकसभा की कार्यवाही विपक्षी हंगामे की भेंट चढ़ गई। राज्यसभा में भी एसआईआर को लेकर गतिरोध बना रहा, हालांकि कार्यवाही जारी रही।
राज्यसभा में हंगामे के बीच कई सदस्यों ने सभापति की अनुमति से प्रदूषण, राज्यों में अवैध घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवासियों को डिटेंशन सेंटर में रखने जैसे मुद्दे उठाए। गुजरात से भाजपा सांसद बाबूभाई देसाई ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी और उससे निपटने के उपायों पर सदन का ध्यान आकर्षित किया।
एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीएलओ की मौतों का जिक्र करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि वह इतने संवेदनशील विषय पर चर्चा से बच रही है। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन ने भी सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जितना चुनाव हारता जा रहा है, उतना ही बौखलाता दिखाई दे रहा है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसे बूथों पर वोट काट रही है, जहां विपक्ष मजबूत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ड्रामा नहीं करता, बल्कि उन लोगों को रोकता है जो जनता से किए वादे पूरे नहीं कर रहे। अखिलेश यादव ने दावा किया कि यूपी और बंगाल की स्थिति भाजपा की रणनीति को उजागर करती है।
लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मणिपुर जीएसटी दूसरा संशोधन विधेयक पारित हो गया, हालांकि सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। दोपहर में स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन एसआईआर के खिलाफ नारेबाजी जारी रही। इसी शोर के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘मणिपुर गुड्स एंड सर्विस टैक्स’ दूसरा संशोधन विधेयक पेश किया।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के कार्यकाल का उल्लेख करने पर भी हंगामा छिड़ गया, क्योंकि सत्ता पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई। खरगे ने कहा कि उन्हें दुख है कि सदन को पूर्व चेयरमैन को औपचारिक विदाई देने का अवसर नहीं मिला।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष को जिम्मेदारी लेने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि पिछले सत्र की तरह यह सत्र भी एसआईआर के मुद्दे पर वॉशआउट की ओर बढ़ रहा है, जबकि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
सत्र के पहले ही दिन एसआईआर पर मचे राजनीतिक घमासान से स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही को प्रभावित करता रहेगा।'
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