व्हाट्सएप पर अमेरिका की सख्ती: सरकारी कर्मचारियों को इस्तेमाल से रोका गया
हाउस साइबरसिक्योरिटी ऑफिस की ओर से सभी स्टाफ को एक मेमो भेजा गया, जिसमें व्हाट्सएप को "उच्च जोखिम वाला एप" बताया गया। मेमो में कहा गया कि व्हाट्सएप यूजर डेटा की सुरक्षा को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाता। इसमें स्टोर किए गए डेटा का एन्क्रिप्शन नहीं है। इसके इस्तेमाल से साइबर अटैक और डेटा लीक का खतरा बढ़ता है
नई दिल्ली (आरएनआई) ईरान के बाद अब अमेरिका की संसद ने व्हाट्सएप को सभी सरकारी डिवाइसेज से बैन कर दिया है। डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे इस निर्णय के पीछे प्रमुख कारण बताए गए हैं। अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिकी सरकार को अपने ही देश के प्रोडक्ट्स और कंपनियों पर भरोसा नहीं रह गया है?
रायटर्स और Axios की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को हाउस साइबरसिक्योरिटी ऑफिस की ओर से सभी स्टाफ को एक मेमो भेजा गया, जिसमें व्हाट्सएप को "उच्च जोखिम वाला एप" बताया गया। मेमो में कहा गया कि व्हाट्सएप यूजर डेटा की सुरक्षा को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाता। इसमें स्टोर किए गए डेटा का एन्क्रिप्शन नहीं है। इसके इस्तेमाल से साइबर अटैक और डेटा लीक का खतरा बढ़ता है।
संसद के कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे व्हाट्सएप को सभी House-प्रबंधित उपकरणों से हटाएं। चाहे वह मोबाइल फोन, कंप्यूटर या वेब ब्राउजर पर ही क्यों न हो। CAO ने ईमेल में लिखा, “अगर आपके डिवाइस पर व्हाट्सएप है, तो आपसे उसे हटाने के लिए संपर्क किया जाएगा।”
व्हाट्सएप की जगह सरकार ने कुछ सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म सुझाए हैं, जैसे- Signal, Microsoft Teams, Wickr, Apple iMessage और FaceTime। स्टाफ को फिशिंग अटैक और अज्ञात नंबरों से आए संदिग्ध संदेशों को लेकर भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
व्हाट्सएप की मूल कंपनी Meta Platforms ने इस फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कंपनी के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा, “हम हाउस के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर द्वारा व्हाट्सएप की सुरक्षा को लेकर की गई व्याख्या से पूरी तरह असहमत हैं।” उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप में संदेश एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं, जिसे व्हाट्सएप भी नहीं देख सकता, जबकि CAO की सूची में कई ऐसे एप्स हैं जिनमें यह सुरक्षा नहीं है। Meta को उम्मीद है कि भविष्य में व्हाट्सएप को अमेरिकी सीनेट की तरह संसद में भी उपयोग की अनुमति मिलेगी।
इससे पहले ईरान ने भी अपने नागरिकों से व्हाट्सएप को हटाने की अपील की थी। वहां आशंका जताई गई थी कि व्हाट्सएप के माध्यम से लोकेशन और अन्य संवेदनशील डेटा विदेशी एजेंसियों, विशेष रूप से इज़राइली सेना, को लीक हो सकते हैं, हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने इस दावे का कोई सबूत नहीं दिया। Meta ने इस आरोप को भी सिरे से खारिज कर दिया।
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