जम्मू बाढ़ त्रासदी: मलबे और कीचड़ से जूझते लोग, मजदूरी न मिलने पर खुद उठा रहे सफाई का बोझ

जम्मू में बाढ़ के बाद मलबा और कीचड़ ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि वे मजदूरों को दिहाड़ी न मिलने के कारण खुद ही घरों की सफाई कर रहे हैं। आर्थिक तंगी के चलते कई परिवारों को सफाई में रिश्तेदारों की मदद लेनी पड़ रही है।

Aug 29, 2025 - 16:39
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जम्मू बाढ़ त्रासदी: मलबे और कीचड़ से जूझते लोग, मजदूरी न मिलने पर खुद उठा रहे सफाई का बोझ

जम्मू (आरएनआई) जम्मू में बारिश ने कहर बरपाया है। घरों में पानी, कीचड़ और मलबा भरा है। लोगों का सामान खराब हो गया है। बाढ़ का नुकसान झेलने के बाद अब ये लोग खुद मलबे को घरों से बाहर निकालने में जुटे हैं। क्योंकि एक मजदूर की दिहाड़ी आठ सौ रुपये से कम नहीं और इनके आर्थिक हालात ऐसे नहीं कि ये दो मजदूर बुला सकें।

गुज्जरनगरइस इलाके में लोगों का जबरदस्त नुकसान हुआ है। चारों तरफ कीचड़ और मलबा भरा है। गलियों में इस कदर फिसलन है कि पैदल गुजरना तक मुश्किल है। जेसीबी मलबा साफ करने में लगी है लेकिन ज्यादातर मकानों के भीतर घुसा पानी और मलबा यहां रहने वाले खुद ही निकाल रहे हैं। स्थानीय निवासी मोहम्मद हनीफ चौधरी कहते हैं कि बाढ़ का नुकसान झेलने के बाद अब मजदूर लगाने के लिए उनके पास पैसे नहीं। उनके अनुसार घर को पूरी तरह साफ करने में हफ्ता-दस दिन लगेगा, लेकिन इसके अलावा काेई चारा नहीं।

यहां तबाही का आलम दूर से ही दिख जाता है। सड़क पर मलबे की वजह से चलना मुश्किल है। ट्रांसफार्मर टूटे पड़े हैं। लोगों ने खराब हो चुका सामान घरों के बाहर फेंक दिया है। कमरों में अभी तक मलबा और कीचड़ है। पीने के पानी के लिए उन्हें हैंडपंप का सहारा है। पानी भरने के लिए प्लास्टिक की केन लिए तेजी से जा रहीं निशा बताती हैं कि उन्होंने बाढ़ पहले भी देखी है लेकिन तबाही का ऐसा मंजर पहले नहीं देखा। उनके अनुसार ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिनके घरों में पानी भरा है, लेकिन वे रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं। मजदूर लगाने के लिए पैसे कहां से लाएं। 

लोअर गोरखा नगर में रहने वाले नितिन का फर्नीचर, फ्रिज आदि सब कुछ खराब हो गया। घर में चारों तरफ मलबा और पानी भरा था। वे बताते हैं कि उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को मलबा निकालने के लिए बुलाया है। दोनों साथ मिलकर दो दिन से घर साफ कर रहे हैं। अभी और भी दिन लगेंगे। 

रोजी-रोटी को कीचड़ में घुसेअशोक एक इलेक्ट्रीशियन हैं। वे एक घर में बिजली का सामान ठीक करने गए थे। उनके कपड़े जूते-सब कीचड़ से भरे थे। बतौर अशोक और कोई वक्त होता तो वे कभी इस तरह कीचड़ में न घुसते। लेकिन बारिश की वजह से काम प्रभावित हुआ है। रोजी-रोटी के लिए वे पानी और कीचड़ कुछ नहीं देख रहे।

लाखों का नुकसान, हजारों मजदूरों को दिएमहाराजा हरि सिंह पार्क के सामने स्थित व्यवसायी शहबाज मलिक कहते हैं कि बीते मंगलवार हुई बारिश से उनके होटल के 12 कमरों में पानी और मलबा भर गया। हालात यह थी कि 12 मजदूरों के साथ खुद लगे। लाखों का नुकसान हुआ। वहीं 800 रुपये प्रति मजदूर के हिसाब से 12 मजदूरों की दिहाड़ी करीब दस हजार एक दिन की दे रहे हैं। अभी तक मलबा निकल रहा है। बारिश के बाद ये मार अलग से पड़ी है। शहबाज की तरह शहर में कई व्यवसायी हैं जो सामान के नुकसान के साथ ही अब बाढ़ के बाद मजदूरों का अतिरिक्त खर्च झेल रहे हैं।  

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