"ऊंची दुकान फीके पकवान" भास्कर ग्रुप पर सटीक बैठता है
आजमगढ़ (आरएनआई) पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन जिले के पंचायत रिपोर्टर्स की हालत इस बात से बिलकुल विपरीत है। दैनिक भास्कर ऐप से जुड़े कई रिपोर्टर्स ने आरोप लगाया है कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं दिया जाता और उन्हें लगातार धमकाया जाता है।
रिपोर्टर्स के अनुसार, उन्हें एक खबर के लिए केवल 20 रुपए दिए जाते हैं। साथ ही, उनकी बड़ी खबरें अक्सर मुख्यालय से किसी और नाम से प्रकाशित कर दी जाती हैं, जबकि छोटी खबरों को हल्की बताकर रिजेक्ट कर दिया जाता है।
रिपोर्टर्स पर रोजाना ऐप डाउनलोड के लिए दबाव बनाया जाता है। 10 डाउनलोड का टारगेट पूरा न करने पर खबरें रोक दी जाती हैं और धमकी दी जाती है कि यदि लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा।
आजमगढ़ जिले के अजमतगढ़ ब्लॉक से जुड़े एक रिपोर्टर ने बताया कि उन्होंने तहसील संबंधी खबर भेजी, जिसे डेस्क ने तीन बार रिजेक्ट किया। जब रिपोर्टर ने इसका कारण पूछा तो बदतमीजी और धमकी दी गई और अंततः उनकी आईडी बंद कर दी गई।
रिपोर्टर्स का कहना है कि यह शोषण न केवल उनकी मेहनत पर हमला है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर भी चोट है। सवाल यह उठता है कि क्या पंचायत रिपोर्टर अब लोकतंत्र की आवाज़ हैं या कॉरपोरेट घरानों के मुफ्त मजदूर बने हुए हैं।
Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0



