'सबसे समान देशों' की रिपोर्ट पर कांग्रेस का हमला: बताया धोखाधड़ी और बौद्धिक बेईमानी
जयराम रमेश ने कहा कि 'जब हम दुनिया के मुकाबले भारत में आय समानता की तुलना करते हैं तो भारत का प्रदर्शन बेहद खराब है। भारत साल 2019 में दुनिया के 216 देशों में 176वें स्थान पर था। दूसरे शब्दों में भारत चौथा सबसे समान समाज नहीं है। यह असल में दुनिया में 40वां सबसे असमान समाज है।'
नई दिल्ली (आरएनआई) एक रिपोर्ट में भारत को चौथा सबसे समान देश बताए जाने पर कांग्रेस पार्टी ने सवाल उठाए हैं और इसे सरकार की धोखाधड़ी और बौद्धिक बेईमानी करार दिया है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार आंकड़ों की हेराफेरी करके देश में बढ़ती असमानता की वास्तविकता को नहीं टाल सकती। दरअसल विश्व बैंक ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि भारत में साल 2011-12 से लेकर 2022-23 के बीच तेजी से असमानता घटी है। रिपोर्ट में भारत को दुनिया में चौथा सबसे समान देश बताया गया है।
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि 'आप क्रोनोलॉजी समझिए। विश्व बैंक ने गरीबी और समानता पर अप्रैल 2025 में रिपोर्ट जारी की। इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने बयान जारी किया जिसमें विश्व बैंक द्वारा भारत में गरीबी और असमानता के लिए बताए गए कई चेतावनी संकेतों की पहचान की गई। जिसमें सरकारी आंकड़ों में असमानता को कम करके आंकने की चेतावनी भी शामिल थी। इस रिपोर्ट के तीन महीने बाद 5 जुलाई को मोदी सरकार और उनके समर्थकों ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें दावा किया गया कि भारत दुनिया के सबसे समान समाज वाले देशों में चौथे नंबर पर है।' कांग्रेस का कहना है कि सरकार का डेटा सीमित उपलब्धता और अनिश्चित गुणवत्ता वाला डेटा है।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने विश्व बैंक की रिपोर्ट के विश्लेषण में लापरवाही बरती और यह पूरी तरह से बौद्धिक बेईमानी है। रमेश ने कहा कि 'जब हम दुनिया के मुकाबले भारत में आय समानता की तुलना करते हैं तो भारत का प्रदर्शन बेहद खराब है। भारत साल 2019 में दुनिया के 216 देशों में 176वें स्थान पर था। दूसरे शब्दों में भारत चौथा सबसे समान समाज नहीं है। यह असल में दुनिया में 40वां सबसे असमान समाज है। भारत में आय असमानता बढ़ी है और मोदी राज में यह बेहद खराब हुई है। भारत में संपत्ति असमानता, आय असमानता के मुकाबले ज्यादा है।'
जयराम रमेश ने कहा कि 'इस सरकार में प्रतिभा की कमी है और बौद्धिक समन्वय की भी कमी है। पीआईबी को इस प्रेस विज्ञप्ति को तुरंत वापस लेना चाहिए।' विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिनी इंडेक्स 25.5 है, जो इसे स्लोवाकिया, स्लोवेनिया और बेलारूस के बाद दुनिया का चौथा सबसे समान देश बनाता है।
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