दिल्ली में आग का खतरा बना बड़ा संकट: 2026 में अब तक 45 मौतें, रोज 80-90 कॉल से जूझ रही फायर सर्विस
नई दिल्ली में आग की घटनाएं लगातार गंभीर रूप लेती जा रही हैं। दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में 3 मई तक ही 45 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग झुलस चुके हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजधानी में रोजाना आग लगने की 80 से 90 कॉल फायर विभाग को मिल रही हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में आग की घटनाओं में 113 लोगों की मौत हुई थी, जो 2025 में घटकर 76 रह गई। हालांकि 2026 के शुरुआती महीनों में ही बढ़ती घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
हाल के हादसों ने इस खतरे की भयावह तस्वीर सामने रख दी है। रोहिणी के बुध विहार इलाके में 15 अप्रैल को झुग्गियों में लगी आग ने एक परिवार को पूरी तरह खत्म कर दिया, जिसमें पति-पत्नी और उनकी तीन साल की बच्ची की मौत हो गई। वहीं पालम में 18 मार्च को एक चार मंजिला इमारत में आग लगने से एक ही परिवार के 9 लोगों की जान चली गई और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अवैध निर्माण, बिजली के खराब सिस्टम और जागरूकता की कमी प्रमुख कारण हैं। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि राजधानी में फायर सेफ्टी को लेकर अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है।
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