कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने ट्रंप प्रशासन पर ठोका मुकदमा, कहा– शैक्षणिक स्वतंत्रता पर खतरा
नई दिल्ली (आरएनआई) कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए मुकदमा दायर किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन शैक्षणिक स्वतंत्रता को कमजोर करने और अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है।
सैन फ्रांसिस्को से एक बड़ी खबर सामने आई है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के छात्रों, प्रोफेसरों और स्टाफ ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि प्रशासन शैक्षणिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को कमजोर करने के लिए नागरिक अधिकार कानूनों का दुरुपयोग कर रहा है।
याचिका में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजेलिस (UCLA) पर 1.2 बिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया और रिसर्च फंडिंग रोक दी। प्रशासन ने विश्वविद्यालय से कई शर्तें मानी जाने की मांग की है, जिनमें छात्रों और स्टाफ का डेटा सौंपना, डाइवर्सिटी स्कॉलरशिप खत्म करना, यूनिवर्सिटी कैंपस पर रातभर प्रदर्शन पर रोक और इमिग्रेशन एजेंसियों से सहयोग करना शामिल है।
UC प्रवक्ता स्टेट होलब्रुक ने कहा, “फेडरल रिसर्च फंडिंग में कटौती से न सिर्फ बायोमेडिकल रिसर्च खतरे में पड़ेगी, बल्कि अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धा और लाखों लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा।” यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया हर साल 17 बिलियन डॉलर से ज्यादा की फेडरल मदद प्राप्त करती है, जिसमें 10 बिलियन डॉलर मेडिकेयर और मेडिकेड से आते हैं।
यह मुकदमा अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स (AAUP) और Democracy Forward जैसे कानूनी समूहों ने दायर किया है। आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन मनमाने तरीके से फेडरल रिसर्च फंडिंग रोक रहा है, जिससे उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार हो रहा है।
यह केवल UCLA तक सीमित नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड, ब्राउन और कोलंबिया जैसी शीर्ष यूनिवर्सिटीज की फंडिंग भी रोकी या रोकने की धमकी दी है। हाल ही में कोलंबिया यूनिवर्सिटी को 200 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा, जिसके बाद 400 मिलियन डॉलर की रिसर्च फंडिंग बहाल हुई।
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