एसआईआर प्रक्रिया पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केरल सरकार; निकाय चुनावों में प्रशासनिक संकट की आशंका जताई
नई दिल्ली (आरएनआई)। केरल सरकार ने राज्य में जारी मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार का कहना है कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (एलएसजीआई) के आगामी चुनावों के समानांतर एसआईआर प्रक्रिया चलने से प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो सकता है और चुनावी तैयारियों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
केरल में एसआईआर की प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हो चुकी है और इसका ड्राफ्ट 4 दिसंबर को जारी किया जाएगा। वहीं, स्थानीय निकाय चुनाव 9 और 11 दिसंबर को दो चरणों में प्रस्तावित हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर अपनी रिट याचिका में मांग की है कि एसआईआर को कम से कम चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक स्थगित किया जाए।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि राज्य में 1200 स्थानीय स्वशासी संस्थाएँ हैं, जिनमें 23,612 वार्ड आते हैं। इन चुनावों के संचालन के लिए 1,76,000 कर्मचारियों और 68,000 सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता होगी, जबकि एसआईआर कराने के लिए अतिरिक्त 25,668 कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। प्रशासन का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मानव संसाधन एक साथ जुटाना संभव नहीं है और इससे शासन-प्रशासन के नियमित कार्य ठप पड़ सकते हैं।
राज्य के मुख्य सचिव ने 5 नवंबर को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर एसआईआर प्रक्रिया टालने का अनुरोध किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद राज्य सरकार ने पहले केरल हाईकोर्ट का रुख किया, जहाँ कोर्ट ने इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है।
सरकार ने यह भी कहा कि संविधान में स्थानीय निकाय चुनावों को समय पर कराने की बाध्यता है, लेकिन एसआईआर को लेकर ऐसी कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है। वहीं, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर केरल में एसआईआर कराने के चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन को चुनौती दी है।
एसआईआर की समयसीमा और चुनाव कार्यक्रम के टकराव ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को और तेज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है।
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