हादसे के बाद हरकत में प्रशासन! लेकिन सवाल वही – क्या मौत की दहलीज़ पर पहुंचकर ही जागेगा सिस्टम?

Friday, June 20, 2025 - 15:16
Updated: 1 year ago
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हादसे के बाद हरकत में प्रशासन! लेकिन सवाल वही – क्या मौत की दहलीज़ पर पहुंचकर ही जागेगा सिस्टम?

गुना (आरएनआई) लक्ष्मीगंज में नगर पालिका परिसर की एक दुकान की छत और दीवार गिरने के 24 घंटे बाद प्रशासन को आखिरकार होश आया। बुधवार को हुए इस हादसे में भले ही जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना एक खतरनाक संकेत थी — और साथ ही प्रशासन की नींद में डूबी लापरवाही का भी कड़वा आईना।

हादसा पहले, कार्रवाई बाद में — ये कैसा सिस्टम?
प्रशासन की सक्रियता हादसे के बाद शुरू हुई, जब गुना कलेक्टर  ने मामले को संज्ञान में लेते हुए नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम को शहर की जर्जर इमारतों का सर्वे करने का आदेश दिया। लेकिन सवाल यही है — क्या ऐसी इमारतें पहले नहीं दिखतीं? क्या अधिकारियों को इनकी खस्ताहाली तब तक नहीं दिखती, जब तक दीवारें लोगों पर ना गिरें?

ज़िम्मेदार कौन?
इस हादसे में सीधे तौर पर नगर पालिका और संबंधित इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही सामने आती है। नगर पालिका की अपनी इमारत ही सुरक्षा के मापदंडों पर खरी नहीं उतरती, तो आमजन से सुरक्षित भवनों में रहने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? क्या इस बिल्डिंग की स्थिति की नियमित जांच होती थी? अगर होती, तो आखिर दीवार और छत गिरने तक कोई अलार्म क्यों नहीं बजा?

सर्वे टीम का गठन और दिशा-निर्देश
कलेक्टर  के निर्देश पर गुरुवार शाम 5 बजे से नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग, CMO मंजूषा खत्री, डिप्टी कलेक्टर और इंजीनियरों की टीम ने शहर की जर्जर इमारतों का निरीक्षण शुरू किया।

हनुमान चौराहा, अभिवाचक संघ चेंबर, विजयवर्गीय कॉम्प्लेक्स सहित कई इमारतों की हालत चिंताजनक पाई गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन इमारतों की सूची तैयार कर जल्द रिपोर्ट पेश की जाए और जहां तत्काल खतरा हो, वहां बिल्डिंग को खाली कराया जाए।

सिर्फ आदेश काफी नहीं, चाहिए ठोस एक्शन
प्रशासन की अपील है कि असुरक्षित इमारतों में ना रहें। लेकिन क्या सिर्फ अपील से जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? जो लोग इन इमारतों में रह रहे हैं, क्या उनके पास विकल्प हैं? क्या नगर पालिका पहले नोटिस देकर उन्हें समय पर अलर्ट नहीं कर सकती थी?
 
यह हादसा एक बार फिर प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता हैक्या कार्रवाई हमेशा जान जोखिम में पड़ने के बाद ही होगी? क्या लापरवाह अफसरों की जवाबदेही तय होगी? क्या कोई स्थायी सर्वे सिस्टम बनेगा, जिससे हर साल जर्जर इमारतों की पहचान समय रहते हो सके?

जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक हर बरसात, हर हादसा और हर गिरती दीवार एक जिंदा सबक बनती रहेगी — जिसे प्रशासन तब तक नहीं पढ़ेगा, जब तक चीखें नहीं सुनाई देंगी। बता दे कि पहिले भी दो बार सर्वे होकर डिस्मेंटल करने का नोटिस दे चुका हैं नपा ओर प्रशासन। 

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