हाई कोर्ट का आदेश: रामभद्राचार्य विरोधी वीडियो सोशल मीडिया से हटाएं, टेक कंपनियों को निर्देश
रामभद्राचार्य के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने टेक कंपनियों को ऐसे वीडियो को हटाने का आदेश दिया।
लखनऊ (आरएनआई) उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट ने रामभद्राचार्य को लेकर चल रहे वीडियोज को लेकर नाराजगी जाहिर की है। हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने टेक कंपनियों को रामभद्राचार्य के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो हटाने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, गूगल और यूट्यूब के अधिकारियों को ये निर्देश दिया। इस मामले में कोर्ट ने टेक कंपनियों को नोटिस भी जारी किया है। स्वामी रामभद्राचार्य के वीडियोज को लेकर शरद चंद्र श्रीवास्तव और अन्य की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने ये आदेश दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अधिकारियों को एक हफ्ते के अंदर स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ चलाए जा रहे वीडियो के खिलाफ प्रत्यावेदन या काउंटर स्टेटमेंट दिया जाए। इसके साथ ही तत्काल कार्रवाई करते हुए वीडियो हटाने की कार्यवाही की जाए।
कोर्ट ने बेधड़क खबर के नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम चैनल चलाने वाले संपादक शशांक शेखर से स्पष्टीकरण मांगते हुए दिव्यांगाें के लिए काम करने वाले स्टेट कमिश्नर को भी उचित कार्रवाई का आदेश दिया। शशांक शेखर पर स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ अपमानजनक वीडियो चलाने का आरोप है। उनपर रामभद्राचार्य की दिव्यांगता को लेकर अपमानजनक कंटेंट वाला वीडियो चलाने का आरोप है। इस वीडियो पर रोक लगाने की भी मांग की गई थी।
दाखिल याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र और राज्य सरकार विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाम लगाने के लिए नियम बनाएं। इसके साथ ही इन नियमों का सख्ती से पालन भी कराएं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि इस कंटेंट के खिलाफ दिव्यांगों के लिए कार्य करने वाले स्टेट कमिश्नर की ओर से कार्रवाई करने का मामला बनता है। मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को तय की गई है।
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