सुरक्षा परिषद में अमेरिका और वेनेजुएला आमने-सामने, बहस हुई तीखी — ट्रंप प्रशासन ने कहा "पीछे नहीं हटेंगे"
न्यूयॉर्क (आरएनआई) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को वेनेजुएला की मांग पर आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में अमेरिका और वेनेजुएला के प्रतिनिधियों के बीच जमकर बहस हुई। वेनेजुएला की मादुरो सरकार ने अमेरिका पर सशस्त्र हमले की तैयारी का आरोप लगाया, जबकि ट्रंप प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कड़ा जवाब दिया।
घटना की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने वेनेजुएला की चार नौकाओं को निशाना बनाया। वेनेजुएला का दावा है कि इन हमलों में 21 लोगों की मौत हुई। अमेरिकी पक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि इन नौकाओं से नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही थी और उनकी कार्रवाई ड्रग कार्टेल के खिलाफ थी।
वेनेजुएला की सरकार का आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निकोलस मादुरो सरकार को अपदस्थ करने की कोशिश कर रहे हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहे हैं। साथ ही कैरेबियाई सागर में अमेरिकी सेना की बढ़ती तैनाती पर भी चिंता व्यक्त की गई।
वेनेजुएला की अपील
संयुक्त राष्ट्र में वेनेजुएला के राजदूत सैमुअल मोनकाडा ने कहा:
"अमेरिकी सरकार की बयानबाजी और आक्रामक कार्रवाई साफ संकेत देती हैं कि हम संभावित सैन्य हमले की स्थिति का सामना कर रहे हैं।"
उन्होंने परिषद से अपील की कि अमेरिका को सैन्य कार्रवाई से रोका जाए और एक प्रस्ताव पारित किया जाए जिसमें अमेरिका सहित सभी देश वेनेज़ुएला की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का संकल्प लें।
रूस और चीन ने वेनेजुएला का समर्थन किया, जबकि बाकी सदस्य देशों ने संयमित रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों से तनाव कम करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करने की अपील की।
अमेरिका का कड़ा रुख
बैठक में अमेरिकी राजदूत या उनके उपप्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। ट्रंप प्रशासन की ओर से राजनीतिक सलाहकार जॉन केली ने प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा:
"राष्ट्रपति ट्रंप स्पष्ट कर चुके हैं कि हम ड्रग कार्टेल को खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे। ये कार्टेल सशस्त्र, संगठित और खतरनाक हैं। अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए हमें बल प्रयोग करना पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका, निकोलस मादुरो को वेनेजुएला का वैध नेता नहीं मानता और मादुरो को “नार्कोटेररिस्ट” करार दिया। मादुरो सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर और वीटो की चुनौती
मोनकाडा ने सुरक्षा परिषद से औपचारिक प्रस्ताव पास करने की मांग की, लेकिन परिषद में अमेरिका की वीटो शक्ति के चलते ऐसे किसी प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, सभी सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वे दूसरे देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें और विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से करें।
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