रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने का साइंटिफिक फार्मूला: रूस को नाटो में शामिल करने का सुझाव
शैलेन्द्र बिरानी
गुना (आरएनआई)। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध तीन साल से अधिक समय से दुनिया के लिए संकट बना हुआ है। लगातार प्रयासों के बावजूद न तो युद्धविराम हो पाया और न ही शांति की राह निकल सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष की जड़ें पुराने गठबंधनों और भय में हैं, जिन्हें समयानुसार बदलने की ज़रूरत है।
विश्लेषण के अनुसार, रूस-यूक्रेन विवाद का स्थायी समाधान विज्ञान और तर्क पर आधारित नए संगठनात्मक ढांचे से संभव है। इसके तहत सुझाव दिया गया है कि:
रूस को नाटो में शामिल किया जाए और कुछ वर्षों के लिए उसे संगठन का प्रमुख बनाया जाए।
यूक्रेन को 1991 के विघटन के समय का मिला भू-भाग वापस मिले, जबकि क्रीमिया में रूस को मुक्त आवागमन और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति हो।
क्रीमिया को इस नए संगठन का मुख्यालय बनाया जाए और वहां एक सामूहिक सेना तैनात हो, जिसमें रूस, यूरोपीय देशों और अमेरिका की संयुक्त भागीदारी हो।
अमेरिका आर्थिक बोझ के चलते कई बार नाटो से अलग होने की धमकी देता रहा है, ऐसे में यह नया ढांचा अमेरिका के लिए भी संतुलनकारी साबित होगा।
विश्लेषण का तर्क है कि जब ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग होकर भी सहयोगी बना रह सकता है, तो अन्य देश भी अलग-अलग रहते हुए एक साझा सुरक्षा और विकास मंच पर साथ आ सकते हैं। रूस पहले से यूरोप को कच्चा तेल और अमेरिका को यूरेनियम व उर्वरक बेच रहा है। यानी व्यावसायिक मित्रता कायम है, ऐसे में युद्ध और परमाणु टकराव का डर सिर्फ भ्रम है।
यह प्रस्ताव बताता है कि यदि सभी "भक्षक देश" अपने-अपने हितों के चलते एक-दूसरे के "रक्षक" बन जाएं, तो न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म हो सकता है, बल्कि तीसरे विश्वयुद्ध और परमाणु संकट की आशंकाओं पर भी विराम लगाया जा सकता है।
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