फर्जी डिग्री पर इलाज का आरोप: डॉक्टर अभिनव सिंह को लेकर गंभीर सवाल, स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी कटघरे में
मथुरा/ललितपुर (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश में एक कथित फर्जी डॉक्टर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। डॉक्टर अभिनव सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना वैध डिग्री के वर्षों तक हृदय रोगियों का इलाज किया। बताया जा रहा है कि वह ललितपुर जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजी से जुड़े मरीजों का दिन-रात उपचार करते रहे, जबकि उनके पास इस विशेषज्ञता की मान्य डिग्री नहीं थी। आरोप है कि उन्होंने अपने जीजा की डिग्री का इस्तेमाल कर करीब तीन वर्षों तक इलाज किया और इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी पर्याप्त जांच नहीं की गई।
सूत्रों के अनुसार, अभिनव सिंह मथुरा के एक निजी मेडिकल कॉलेज से भी जुड़े रहे हैं, जहां वे कार्डियोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत बताए जाते हैं। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने कई डॉक्टरों को पढ़ाया और प्रशिक्षण दिया। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों में यह भी कहा जा रहा है कि इस तरह की कथित लापरवाही से न जाने कितने मरीजों की जान खतरे में पड़ी।
मामले में एक निजी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि संस्थान के मुखिया की कथित कोठी नगर निगम की संपत्ति पर बनी है, जो कभी वृंदावन में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दान में मिले प्रसूतिका भवन की भूमि बताई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बिना डिग्री के इलाज कैसे और किसके संरक्षण में चलता रहा।
गौरतलब है कि इससे पहले मध्यप्रदेश में भी एक फर्जी डॉक्टर का मामला सामने आ चुका है, जिसने कथित तौर पर कई बड़े ऑपरेशन किए थे और लाखों रुपये फीस वसूली थी। ताजा मामला सामने आने के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, सख्त जांच और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।
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