कई शहरों में सरकारी इमारतों में आगजनी, इंडिगो ने काठमांडू उड़ानें रद्द कीं
काठमांडू (आरएनआई) नेपाल के युवाओं के आक्रोश ने देश में राजनीतिक-सामाजिक उथल-पुथल पैदा कर दी है। आक्रोशित जेन-जी (युवाओं) की भीड़ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के घरों को आग लगा दी। इसके अलावा देश की संसद, सुप्रीम कोर्ट और कई सरकारी इमारतों में भी आगजनी की गई। भारत ने बिगड़ते हालात पर चिंता जाहिर की है। एतहतियात के तौर परएयर इंडिया, इंडिगो और नेपाल एयरलाइंस ने दिल्ली से काठमांडो जाने वाली उड़ानों को रद्द कर दिया है।
नेपाल में हालात को देखते हुए इंडिगो एयरलाइंस ने काठमांडू जाने वाली उड़ानें अगले आदेश तक रद्द कर दी हैं। इंडिगो ने एडवाइजरी जारी कर बताया कि काठमांडू से आने और जाने वाली सभी उड़ानें 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक रद्द रहेंगी। एयरलाइंस ने काठमांडू एयरपोर्ट के बंद होने को इसकी वजह बताया है।
पुलिस ने बताया कि चितवन जिले में प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को जिला प्रशासन कार्यालय और उससे सटे चुनाव कार्यालय में आग लगा दी। जिला न्यायालय, भू-राजस्व और सरकारी वकीलों के कार्यालयों में भी आग लगा दी गई, जिससे दस्तावेज नष्ट हो गए। भरतपुर और अन्य इलाकों में नगरपालिका और वार्ड कार्यालयों पर भी हमला किया गया। नेपाली कांग्रेस, यूएमएल और माओवादी केंद्र पार्टियों के स्थानीय कार्यालयों में आग लगा दी गई। भरतपुर के भटभटेनी सुपरमार्केट में मंगलवार शाम लगी आग बुधवार सुबह भी काबू से बाहर थी।
नक्खू जेल में भ्रष्टाचार के आरोप में बंद राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व उप प्रधानमंत्री रबि लामिछाने को प्रदर्शनकारियों ने जेल से छुड़ा लिया। उन्हें बीते साल 18 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया था। छात्रों के आंदोलन के बाद जेल प्रशासन ने लामिछाने की सुरक्षा सुनिश्चित करने से मना कर दिया। इसके बाद, उनकी पत्नी निकिता पौडेल ने व्यक्तिगत तौर पर सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें जेल से बाहर निकाला। लामिछाने की रिहाई के बाद नक्खू जेल से सभी कैदी बाहर निकल गए। इस जेल में लगभग 1,500 कैदी बंद थे। बदले हालात में लामिछाने भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने नेताओं के घरों के साथ ही नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल समेत कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों में भी आग लगा दी। सुरक्षाकर्मियों ने नेताओं व उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश की। धनगढ़ी में प्रदर्शनकारियों ने जेल का फाटक तोड़ दिया, जिसके बाद सैकड़ों कैदी जेल से फरार हो गए। काठमांडो में जगह-जगह सड़कों पर टायर जलाकर रास्ता रोका गया।
हामी नेपाल नामक संगठन वैसे तो 2015 से सक्रिय है लेकिन इसे 2020 में पंजीकृत कराया गया था। जानकारी के मुताबिक, इसका असल मुखिया संदर्क रूइट नामक एक सर्जन है। उसे हामी नेपाल ने अपना मेंटर बताया है। एनजीओ के 1600 से ज्यादा सदस्य हैं। हामी नेपाल ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटाने के लिए इंस्टाग्राम और डिस्कोर्ड एप का इस्तेमाल किया जिसमें ग्रुप चैट में लगातार निर्देश दिए जा रहे थे।
गुरुंग लगातार आंदोलनकारियों को एकजुट करने में लगे हैं। वह लगातार वीडियो जारी कर कर रहे हैं। ऐसे ही एक वीडियो में उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने हमारे कई भाइयों और बहनों को मार डाला है। इसलिए इस सरकार को काबिज रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
नेपाल में आंदोलन भड़कने के बीच एक ही नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ रहा है, वो है 36 वर्षीय सुदन गुरुंग का। गुरुंग को ही जेन-जी के इस आंदोलन का चेहरा माना जा रहा है। वह हामी नेपाल नामक एक एनजीओ के कर्ताधर्ता हैं। उनका संगठन नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं में मदद करने का दावा करता है। यह संगठन युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है, यही वजह है कि उनकी एक आवाज पर हजारों युवा सड़कों पर उतर आए।
चीन ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे और नेपाल में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ओली का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब उन्होंने हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लिया तथा चीन की जापान पर विजय की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में शामिल हुए। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने ओली के इस्तीफे और सोमवार को काठमांडो व अन्य क्षेत्रों में हुए विरोध प्रदर्शन की संक्षिप्त जानकारी दी। ओली दूसरे दक्षिण एशियाई नेता हैं, जिनका इस्तीफा उच्चस्तरीय चीन दौरे के बाद विद्रोह के बीच हुआ है इससे पहले बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के साथ भी ऐसा हो चुका है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण समाधान के लिए संयम बरतने और वार्ता में शािमल होने की अपील की है। उन्होंने कहा, देश कठिन हालात से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, इसलिए गतिरोध का समाधान खोजने के लिए देश, लोगों और लोकतंत्र से प्रेम करने वाले सभी पक्षों के सहयोग की जरूरत है।
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