वैश्विक अयप्पा सम्मेलन से स्टालिन का किनारा, विजयन को पत्र; कांग्रेस-भाजपा ने किया हमला
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केरल में 20 सितंबर को होने वाले वैश्विक अय्यप्पा सम्मेलन में शामिल न होने की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने अपनी जगह दो मंत्रियों को भेजने की बात कही है। इस सम्मेलन को लेकर केरल भाजपा और विपक्षी नेताओं ने वाम सरकार पर 'बहुसंख्यक तुष्टिकरण' और चुनावी नाटक करने का आरोप लगाया है।
चेन्नई (आरएनआई) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने केरल समकक्ष पिनरई विजयन को सूचित किया है कि वह 20 सितंबर को पंबा में होने वाले वैश्विक अय्यप्पा सम्मेलन में पहले से तय कार्यक्रमों के कारण शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि वह अपनी ओर से दो मंत्रियों को इस आयोजन में भेजेंगे। स्टालिन की ओर से यह जवाब तब आया है, जब भाजपा दोनों मुख्यमंत्रियों की संभावित भागीदारी का कड़ा विरोध कर रही है।
स्टालिन ने विजयन को पत्र लिखकर बताया कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित इस सम्मेलन में वह पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से शामिल नहीं हो सकेंगे। यह बोर्ड प्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर का प्रबंधन करता है और यह सम्मेलन 20 सितंबर को पवित्र पंबा नदी के किनारे आयोजित किया जाएगा। सोमवार रात को जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, स्टालिन ने अपने पत्र में कहा, मैं त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्लेटिनम जुबली समारोह में पहले से तय कार्यक्रमों के चलते शामिल नहीं हो पा रहा हूं।
उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी जगह दो मंत्रियों पी. के. शेखर बाबू (हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग) और पालनिवेल थियागराजन (सूचना प्रौद्योगिकी विभाग) को इस आयोजन में भेजेंगे। केरल के देवस्वम मंत्री वी. एन. वासवन ने पिछले हफ्ते स्टालिन को पत्र लिखकर उन्हें इस सम्मेलन में आमंत्रित किया था, जो कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की प्लेटिनम जुबली का हिस्सा है।
दो दिन पहले इस आमंत्रण को लेकर केरल में सियासी घमासान शुरू हो गया था, जब भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस कार्यक्रम में स्टालिन की संभावित भागीदारी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने दोनों मुख्यमंत्रियों से हिंदुओं से माफी मांगने की मांग की थी। चंद्रशेखर ने चेतावनी दी कि यदि पिनरई विजयन और स्टालिन हिंदुओं से माफी नहीं मांगते, तो भाजपा कार्यकर्ता इस सम्मेलन में उनकी भागीदारी के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।
राजीव चंद्रशेखर ने अपने बयान में कहा था, पिनरई, स्टालिन और उनके उपमुख्यमंत्री बेटे उदयनिधि स्टालिन ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और हिंदू आस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। पिनरई सरकार ने कई अय्यप्पा भक्तों को जेल में डाला और उन पर पुलिस की बर्बरता की, जब उन्होंने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसी आस्था की रक्षा करने की कोशिश की थी।
वहीं, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी सतीसन ने आरोप लगाया कि सबरीमला में वामपंथी सरकार की ओर से आयोजित किया जा रहा वैश्विक अयप्पा सम्मेलन राज्य में 'बहुसंख्यक तुष्टिकरण' की कोशिश है। सतीसन ने सवाल उठाया कि माकपा को सबरीमला के प्रति इतनी 'ममता' कब से हो गई, जहां भगवान अय्यप्पा का प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर स्थित है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, सबरीमला के नाम पर वे बहुसंख्यक तुष्टिकरण कर रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही वे ऐसा कर रहे हैं।
सतीसन ने तंज कसते हुए कहा कि वामपंथी पार्टी को यह कार्यक्रम संघ परिवार के साथ मिलकर करना चाहिए, क्योंकि अब दोनों हर बात में साथ हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष को इस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया है। यह कार्यक्रम 20 सितंबर को पंपा में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड और केरल सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। केरल भाजपा ने इस आयोजन को चुनाव से ठीक पहले किया जा रहा 'नाटक' बताया और कहा कि यह लोगों को बेवकूफ बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
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