राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: SHO सिर्फ चार्जशीट भेजने वाला 'पोस्ट ऑफिस' नहीं

Jul 18, 2026 - 22:14
Jul 18, 2026 - 22:50
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राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: SHO सिर्फ चार्जशीट भेजने वाला 'पोस्ट ऑफिस' नहीं

राजस्थान(आरएनआई)राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया है कि स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) केवल जांच अधिकारी (IO) द्वारा तैयार की गई चार्जशीट को अदालत भेजने वाले "पोस्ट ऑफिस" नहीं हैं। चार्जशीट दाखिल करने से पहले SHO का यह कानूनी दायित्व है कि वे रिकॉर्ड, साक्ष्यों और जांच की निष्पक्षता का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करें।

 मामले का विवरण:

यह मामला एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता के पैर में फ्रैक्चर हुआ था। आरोप था कि पुलिस ने जानबूझकर गंभीर चोट (Grievous Hurt) से संबंधित धारा को चार्जशीट में शामिल नहीं किया, जिससे पीड़ित को उचित मुआवजा मिलने में बाधा आई। इसके बाद संबंधित SHO और जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ IPC की धारा 166 और 167 के तहत कार्रवाई की मांग की गई।

 हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी:

अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष सुनवाई संविधान के अनुच्छेद 20 और 21 के तहत संरक्षित अधिकार हैं। SHO यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि जांच केवल IO ने की थी। उन्हें जांच की निगरानी करनी होगी और चार्जशीट दाखिल करने से पहले अपने स्वतंत्र विवेक का उपयोग करना होगा।

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