हिंद महासागर में रणनीतिक बढ़त की ओर भारत: सेशेल्स के साथ मजबूत होंगे सामरिक रिश्ते, चीन को संतुलित करने की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब 11 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब हिंद महासागर वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है और चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत अपने भरोसेमंद समुद्री साझेदारों के साथ संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
सेशेल्स रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी यात्रा भारत और सेशेल्स के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को नई मजबूती देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे समुद्री सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और सुरक्षित, शांतिपूर्ण तथा समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत की रणनीति सैन्य अड्डे स्थापित करने के बजाय साझेदार देशों की क्षमता बढ़ाने, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर आधारित रही है। ऐसे में सेशेल्स के साथ बढ़ता सहयोग हिंद महासागर में भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अफ्रीका, पश्चिम एशिया और एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थित सेशेल्स की सामरिक अहमियत लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि भारत अपने महासागर विजन में सेशेल्स को प्रमुख साझेदार के रूप में देखता है। सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी भी दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का संकेत मानी जा रही है।
यात्रा के दौरान सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी द्वारा आयोजित राजकीय रात्रिभोज में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और सेशेल्स की मित्रता स्थिर, मजबूत और दीर्घकालिक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश आपसी सहयोग, विकास और साझा हितों के आधार पर भविष्य में भी नई ऊंचाइयों को हासिल करेंगे। साथ ही उन्होंने दोहराया कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए भारत अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।
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