मां कामाख्या की विशेष पूजा के साथ अघोर पीठ में मनाया गया अंबुवाची पर्व

Saturday, June 27, 2026 - 09:49
Updated: 3 months ago
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मां कामाख्या की विशेष पूजा के साथ अघोर पीठ में मनाया गया अंबुवाची पर्व

सुलतानपुर (आरएनआई) आज अघोरपीठ बाबा सत्यनाथ मठ अल्देमऊ नूरपुर कादीपुर में पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चण्डेश्वर कपाली बाबा के संरक्षण में मां कामाख्या की विशेष पूजा अम्बूवाची पूरे विधि-विधान तांत्रोक्त विधि से देर रात में सम्पन्न हुई।इस अवसर पर मठ के पीठाधीश्वर अवधूत कपाली बाबा ने बताया कि अम्बूवाची पर्व मां कामाख्या के प्रति हर साल जून महीने (आषाढ़ मास) में मनाया जाने वाला एक प्रमुख आध्यात्मिक और तांत्रिक उत्सव है। यह त्योहार देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म (रजस्वला काल) का प्रतीक है, जो नारी शक्ति, प्रजनन क्षमता और सृजन के सम्मान का बोध कराता है

अंबुबाची महायोग असम के गुवाहाटी में नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र वार्षिक उत्सव है।यह मुख्य रूप से देवी कामाख्या के वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) चक्र का प्रतीक है। 

इस महायोग से जुड़े तंत्र और रहस्य को उद्घाटित करते हुए अवधूत कपाली बाबा ने कहा कि यह पूजा असम में मां कामाख्या के मन्दिर में आयोजित की जाती है लेकिन साधकों और भक्तों की उपलब्धता देखते हुए उस महायोग की पूजा पूरे विधि के साथ अब यहां मठ परिसर में करायी गयी। पर्व की अवधि (चार दिन): आषाढ़ मास (जून) के दौरान मनाए जाने वाले इस उत्सव में देवी के आराम करने की मान्यता है, जिसके चलते मंदिर के कपाट तीन दिनों तक पूरी तरह बंद रहते हैं। इस दौरान न तो पूजा-पाठ होती है और न ही कोई कृषि कार्य किया जाता है। चौथे दिन की पूजा: चौथे दिन विशेष शुद्धिकरण स्नानादि के बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाते हैं।इसे 'निवृत्ति' कहा जाता है, जिसके बाद दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।धार्मिक और तांत्रिक महत्व में इसे "पूर्व का महाकुंभ" भी कहा जाता हैं।इस दौरान असम के कामाख्या देवी मन्दिर में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु, तांत्रिक, साधु और अघोरी इकट्ठा होते हैं और शक्ति की उपासना करते हैं।यह महायोग माँ शक्ति, पृथ्वी की उर्वरता और नारी शक्ति के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मां कामाख्या देवी की इस विशेष पूजा के अवसर पर मठ परिसर व मन्दिर में देर रात तक सैकड़ों महिला पुरुष श्रद्धालु, अघोरी,साधक उपस्थित रहे।

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