बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज, कांग्रेस और बीकेटीसी आमने-सामने
बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आरोपों के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पलटवार किया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में मंदिर निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों के लिए धन स्वीकृत किया गया था, न कि चढ़ावे में किसी प्रकार की हेराफेरी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सार्वजनिक बहस की चुनौती तो दी, लेकिन तय समय पर चर्चा के लिए उपस्थित नहीं हुए।
प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में गोदियाल ने कहा कि बहस की चुनौती देने के बाद उपस्थित न होना यह दर्शाता है कि आरोप लगाने वालों के पास तथ्यों के आधार पर जवाब नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।
गोदियाल ने बताया कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी। उनके अनुसार, वर्ष 2010 में तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान 32 कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसमें प्रमोद नौटियाल का नाम भी शामिल था। बाद में वर्ष 2014 में शासन की स्वीकृति मिलने के बाद उनका नियमितीकरण किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि बिनसर मंदिर और पोखरी स्थित शिव मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बोर्ड की स्वीकृति के बाद धनराशि जारी की गई थी। करीब नौ लाख रुपये खर्च होने के बाद वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने पर बिनसर मंदिर का निर्माण कार्य रोक दिया गया। बाद में देवस्थानम बोर्ड की बैठक में दोबारा निर्माण को मंजूरी दी गई। इसके अलावा टिहरी जिले के प्रतापनगर में मंदिर समिति को आवंटित भूमि तक संपर्क मार्ग निर्माण के लिए भी धन उपलब्ध कराया गया था।
गोदियाल ने सवाल उठाया कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही थे तो भाजपा सरकार और बीकेटीसी ने पिछले नौ वर्षों में इसकी जांच क्यों नहीं कराई। उन्होंने यह भी दावा किया कि बीकेटीसी अध्यक्ष से जुड़े किसी कर्मचारी की तैनाती दान गणना की ड्यूटी में नहीं की जा सकती।
वहीं, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पत्रकार वार्ता कर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों का जवाब दिया और अपने पक्ष को रखा। मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
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