कश्मीर की राजनीति की बेबाक आवाज़ खामोश, नहीं रहे डॉ. शेख मुस्तफा कमाल
जम्मू-कश्मीर की राजनीति के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख चेहरों में शामिल डॉ. शेख मुस्तफा कमाल का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद श्रीनगर के पारस अस्पताल में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। मंगलवार रात करीब 8:30 बजे उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
डॉ. शेख मुस्तफा कमाल, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और बेगम अकबर जहान अब्दुल्ला के पुत्र थे। उन्होंने कश्मीर की राजनीति के महत्वपूर्ण दौर को करीब से देखा और बाद में नेशनल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वे पार्टी के सबसे मुखर और स्पष्टवादी नेताओं में गिने जाते थे।
मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने राजनीति को अपना पूर्णकालिक क्षेत्र बनाया। 1983 में वे जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के सदस्य बने और 1987 में गुलमर्ग विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने कई बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
डॉ. कमाल ने 1983, 1987 और 1996 में जम्मू-कश्मीर सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वे अपने सरल स्वभाव, आम लोगों तक सहज पहुंच और पार्टी कार्यकर्ताओं से मजबूत जुड़ाव के लिए भी जाने जाते थे। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों की समस्याएं सुनना और उनके समाधान का प्रयास करना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
नेशनल कॉन्फ्रेंस में उन्हें डॉ. फारूक अब्दुल्ला के विश्वसनीय सलाहकारों में माना जाता था। पार्टी संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति तैयार करने और नीतिगत निर्णयों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
डॉ. शेख मुस्तफा कमाल के निधन पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके निधन का समाचार अत्यंत दुखद है और इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार, शुभचिंतकों और समर्थकों के साथ हैं।
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