पीओके में पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन तेज, आरक्षित सीटों के फैसले के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में रावलकोट समेत कई इलाकों में बड़ी रैलियां और प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों का विरोध किया।
रिपोर्टों के अनुसार, विरोध की शुरुआत उस निर्णय के बाद हुई, जिसमें पाकिस्तान सरकार ने जम्मू-कश्मीर से पलायन कर आए लोगों के लिए पीओके विधानसभा में 12 सीटें आरक्षित करने की घोषणा की। स्थानीय संगठनों ने इसका विरोध करते हुए इसे क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के खिलाफ बताया। बाद में आंदोलन महंगाई, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कथित प्रशासनिक दमन जैसे अन्य मुद्दों तक भी फैल गया।
सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में रावलकोट में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी वाली रैलियां दिखाई दे रही हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन रैलियों में प्रदर्शनकारियों ने पीओके की राजनीतिक स्थिति और पाकिस्तान के प्रशासन को लेकर तीखी टिप्पणियां कीं। हालांकि, इन वायरल वीडियो और उनमें किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमान खान के हवाले से कहा गया है कि कश्मीर की स्थिति को लेकर उनका संगठन पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक व्याख्या से अलग दृष्टिकोण रखता है।
पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने भी सोशल मीडिया पर इन प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के आधिकारिक दावों पर सवाल खड़े करते हैं।
वहीं, पाकिस्तान सरकार ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर प्रतिबंध लगा दिया है। संगठन ने मुजफ्फराबाद तक "लॉन्ग मार्च" का आह्वान किया है। इसे देखते हुए रावलकोट और मुजफ्फराबाद सहित कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, अब तक प्रदर्शन और झड़पों में प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों सहित कई लोगों की मौत हो चुकी है। क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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