“ये तो हद है…” करनाल में भाजपा दफ्तर तक सड़क बनाने के लिए 40 पेड़ उखाड़े, सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को लगाई कड़ी फटकार
नई दिल्ली (आरएनआई)। करनाल में भाजपा के नए दफ्तर तक सड़क बनाने के लिए 40 बड़े पेड़ उखाड़े जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने इसे गंभीर पर्यावरणीय लापरवाही बताते हुए राज्य सरकार से सुधारात्मक एक्शन प्लान तुरंत पेश करने को कहा और स्पष्ट चेतावनी दी कि इस मामले में जिम्मेदार सभी विभागों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह याचिका 1971 युद्ध के एक पूर्व सैनिक ने दायर की है, जिन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा को रिहायशी इलाके में मनमाने ढंग से प्लॉट दिया गया और बाद में दफ्तर तक सड़क बनाने के लिए एक हरे-भरे क्षेत्र के 40 परिपक्व पेड़ उखाड़ दिए गए। हाईकोर्ट ने 3 मई को याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के वकील, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से तीखे सवाल किए— “इन पेड़ों का क्या हुआ? इन्हें क्यों उखाड़ा गया? भाजपा का दफ्तर किसी और जगह क्यों नहीं बनाया जा सकता था?”
बनर्जी ने दलील दी कि सभी आवश्यक अनुमति ली गई थी और पर्यावरणीय नियमों का पालन किया गया। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि जितने पेड़ काटे गए हैं, उतने ही नए लगाए जाएंगे।
लेकिन पीठ ने उनकी बातों पर असंतोष जताते हुए पूछा कि
“इन 40 बड़े पेड़ों के काटे जाने से जो पर्यावरणीय नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा?”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नए पौधे लगाने से इतने बड़े और विकसित पेड़ों की क्षति की भरपाई नहीं होती। अदालत ने सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब और एक्शन प्लान मांगते हुए चेतावनी दी कि यदि लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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