मोदी सरकार की नीतियों ने सामाजिक न्याय की पिछली उपलब्धियों को कमजोर किया: खरगे का केंद्र पर हमला

Dec 14, 2025 - 11:15
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मोदी सरकार की नीतियों ने सामाजिक न्याय की पिछली उपलब्धियों को कमजोर किया: खरगे का केंद्र पर हमला

नई दिल्ली (आरएनआई) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को केंद्र की मोदी सरकार पर संविधान को कमजोर करने और सामाजिक न्याय से जुड़ी पूर्व की उपलब्धियों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पिछली सरकारों ने दलितों और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में जो मजबूत आधार तैयार किया था, मौजूदा सरकार की नीतियां उसे धीरे-धीरे खत्म कर रही हैं।

कांग्रेस की अनुसूचित जाति (एससी) सलाहकार समिति की पहली बैठक को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि भाजपा सरकार आरक्षण को कमजोर कर रही है, समानता को बढ़ावा देने के बजाय भेदभाव को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देगी। खरगे ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने आजादी से पहले ही समाज में व्याप्त भेदभाव को खत्म करने का संकल्प लिया था और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में राज्य की भूमिका को अहम माना था।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसी सोच के तहत नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 जैसे ऐतिहासिक कानून बनाए गए। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी की सरकार ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के जरिए यह स्पष्ट किया कि दलितों के खिलाफ होने वाले अत्याचार केवल अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय पर सीधा हमला हैं। बाद की कांग्रेस सरकारों ने इस कानून को और सख्त बनाते हुए अग्रिम जमानत पर रोक, त्वरित जांच, पीड़ितों के लिए अधिक मुआवजा और विशेष अदालतों की व्यवस्था की।

खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा शिक्षा को सामाजिक समानता का सबसे मजबूत रास्ता माना। इसी सोच के साथ पोस्ट-मैट्रिक और प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं, एससी छात्रों के लिए छात्रावास, टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम, आईआईटी, आईआईएम और मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण, सर्व शिक्षा अभियान, मिड-डे मील योजना और शिक्षा का अधिकार कानून जैसे कार्यक्रम लागू किए गए। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के चलते दलित बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी और आज देश में लाखों अनुसूचित जाति के डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, अधिकारी और उद्यमी हैं, जिनकी सफलता की यात्रा इन्हीं योजनाओं से शुरू हुई।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार दलितों की आवाज को दबाने का काम कर रही है। उन्होंने रोहित वेमुला प्रकरण, भीमा-कोरेगांव के बाद की कार्रवाई और विश्वविद्यालयों में दलित छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव का जिक्र करते हुए कहा कि हर जगह दलितों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की गई है। खरगे ने कहा कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकार छीने जा रहे हैं, जबकि डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि किसी समाज की प्रगति का पैमाना यह है कि उसका सबसे कमजोर व्यक्ति कितना सुरक्षित है।

खरगे ने कहा कि आज स्थिति इसके ठीक उलट है। आरक्षण को कमजोर करने वाली नीतियां, निजीकरण के जरिए दलितों के लिए नौकरियों के अवसरों में कमी और विश्वविद्यालयों में एससी/एसटी फैकल्टी की घटती भर्ती यह साफ दिखाती है कि मोदी सरकार उस संविधान की भावना को कमजोर कर रही है, जिसकी नींव सामाजिक न्याय पर टिकी है।

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