भर्ती विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: कहा – वैकल्पिक उपाय होने पर हाईकोर्ट को न्यायाधिकरण को दरकिनार नहीं करना चाहिए

Friday, October 24, 2025 - 13:32
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भर्ती विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: कहा – वैकल्पिक उपाय होने पर हाईकोर्ट को न्यायाधिकरण को दरकिनार नहीं करना चाहिए

नई दिल्ली (आरएनआई): सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा कि जब किसी वैधानिक न्यायाधिकरण के समक्ष प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो, तो हाईकोर्ट को सीधे रिट याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती विवाद असाधारण परिस्थितियों की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए ऐसे मामलों में न्यायाधिकरण को ही पहले निपटारा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

यह आदेश कर्नाटक में 15,000 स्नातक प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती से जुड़े विवाद पर दिया गया। इस भर्ती प्रक्रिया में विवाहित महिला उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाणपत्रों को लेकर लंबा कानूनी विवाद चला था।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट को तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब कोई प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध न हो। कोर्ट ने कहा, “सेवा संबंधी मामलों में न्यायाधिकरण का गठन ही इसलिए किया गया है ताकि ऐसे विवादों का त्वरित और विशेषज्ञ समाधान हो सके। हाईकोर्ट की भूमिका न्यायिक समीक्षा तक सीमित रहनी चाहिए।”

विवाद की पृष्ठभूमि
कर्नाटक लोक शिक्षा विभाग ने 21 मार्च 2022 को भर्ती अधिसूचना जारी की थी। मई 2022 में परीक्षाएं हुईं और 18 नवंबर 2022 को अस्थायी चयन सूची प्रकाशित की गई। इस सूची में कई विवाहित महिला अभ्यर्थियों को ओबीसी श्रेणी से बाहर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपने पिता के नाम पर जाति-सह-आय प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे, पति के नाम पर नहीं।

महिला अभ्यर्थियों ने तर्क दिया कि “किसी महिला की जाति उसके जन्म और माता-पिता की स्थिति से निर्धारित होती है, विवाह से नहीं।” इस तर्क को मानते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 30 जनवरी 2023 को राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया और प्रभावित अभ्यर्थियों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने का निर्देश दिया।

सरकार की अपील और खंडपीठ का फैसला
राज्य सरकार ने इस निर्णय को चुनौती दी, जिसके बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 12 अक्टूबर 2023 को कहा कि ऐसे सेवा संबंधी विवादों पर फैसला कर्नाटक राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण (KSAT) के अधिकार क्षेत्र में आता है। खंडपीठ ने भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन सभी तर्क न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए खुले रखे।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय को सही ठहराया
पीड़ित अभ्यर्थियों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत ने सभी अपीलें खारिज कर दीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब वैकल्पिक उपाय मौजूद हो, तो सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना न्यायिक अनुशासन के विरुद्ध है।

अदालत ने अपने निर्णय में एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997) के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि “सेवा न्यायाधिकरण ऐसे मामलों में प्रथम दृष्टया न्यायालय के रूप में कार्य करते हैं और हाईकोर्ट की भूमिका केवल न्यायिक समीक्षा तक सीमित रहती है।”

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भविष्य में भर्ती और सेवा विवादों से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित होगा। अदालत ने दोहराया कि वैकल्पिक उपाय होने पर हाईकोर्ट को सीधे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की अनुशासन और दक्षता बनी रहे।

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