भटहट उपकेंद्र से 40 लाख का पावर ट्रांसफार्मर चोरी-छिपे बेचने का मामला, चेयरमैन ने जांच के आदेश दिए
गोरखपुर (आरएनआई) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले में विद्युत निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर करोड़ों के गबन का गंभीर आरोप लगा है। भटहट उपकेंद्र पर रखा तीन एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर कथित रूप से कबाड़ के तौर पर बेच दिया गया। इसकी अनुमानित बाजार कीमत 35 से 40 लाख रुपये बताई जा रही है।
मामले की जानकारी सामने आने पर उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने जांच के आदेश दे दिए हैं। घटना के खुलासे के बाद निगम के अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2014 में भटहट उपकेंद्र पर तीन-तीन एमवीए क्षमता के दो ट्रांसफार्मर लगाए गए थे।
उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के बाद इन्हें बदलकर पांच-पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर लगाए गए।
पुराने दोनों तीन एमवीए के ट्रांसफार्मर वहां बिना किसी लिखित अभिलेख के रख दिए गए थे।
बाद में एक पांच एमवीए ट्रांसफार्मर हटाकर 10 एमवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया, जिसके बाद एक पांच एमवीए और दो तीन एमवीए ट्रांसफार्मर उपकेंद्र पर रखे रह गए।
इन्हीं तीन एमवीए के एक ट्रांसफार्मर को कथित रूप से कर्मचारियों ने दो हिस्सों में बेच दिया। पहले इसके अंदर का कॉपर वायर निकालकर गोरखनाथ क्षेत्र में बेचा गया। इसके बाद 25 अगस्त को ट्रांसफार्मर की पूरी बॉडी भी कबाड़ के रूप में बेच दी गई।
ट्रांसफार्मर कितना बड़ा था?
वजन: 6000 किलोग्राम से अधिक
तेल क्षमता: लगभग 1700 लीटर
औसत बाजार मूल्य: 35 लाख रुपये से अधिक
जांच का दायरा बढ़ा
चेयरमैन ने इस घटना में शामिल कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। पिछले दस वर्षों में भटहट उपकेंद्र पर तैनात जेई, एसडीओ और विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंताओं के नामों की भी जांच की जा रही है।
कैसे हुआ यह खेल?
उपकेंद्र से हटाए गए ट्रांसफार्मर आमतौर पर आवश्यकता के अनुसार दूसरे उपकेंद्रों पर भेजे जाते हैं। लेकिन तीन एमवीए क्षमता के पुराने ट्रांसफार्मरों की अब जरूरत न होने के कारण उन्हें वहीं छोड़ दिया गया था। न कोई रिकॉर्ड, न मॉनिटरिंग — इसी का फायदा उठाकर कर्मचारियों ने चोरी-छिपे बिक्री कर दी।
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