तालिबान का सख्त रुख, पाकिस्तान की मांग ठुकराई — इस्तांबुल वार्ता में गतिरोध जारी
इस्तांबुल (आरएनआई) — तुर्किये के इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही उच्चस्तरीय वार्ता दूसरे दिन भी बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। अफगान तालिबान ने पाकिस्तान की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ लिखित आश्वासन या ठोस कार्रवाई की प्रतिबद्धता दे।
तालिबान का रुख बना विवाद का कारण
वार्ता में गतिरोध के बाद पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि तालिबान की यह हिचकिचाहट क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है और आगे की बातचीत उनके सकारात्मक रुख पर निर्भर करेगी। ‘डॉन’ अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, नौ घंटे चली बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच इस बात पर सहमति नहीं बन सकी कि आतंकवादी संगठनों को खत्म करने के लिए तालिबान किस प्रकार की कार्रवाई करेगा।
पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि अफगानिस्तान को सीमा पार और अपने भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए विश्वसनीय कदम उठाने होंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया, “तालिबान की प्रतिक्रिया वास्तविकताओं से परे और तर्कहीन रही। ऐसा लगता है कि उनका प्रतिनिधिमंडल किसी अन्य एजेंडे पर काम कर रहा है।”
संघर्ष विराम के दौरान भी तनाव
इस्तांबुल वार्ता के बीच ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लीपा सेक्टर में संघर्ष विराम उल्लंघन की खबर आई। हालांकि किसी हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रविवार शाम को दोनों ओर से तीव्र गोलीबारी हुई। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि यह स्थिति दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के हित में नहीं है, और शांति प्रक्रिया की सफलता अब पूरी तरह तालिबान की नीयत पर निर्भर करती है।
तालिबान ने नहीं दिया लिखित आश्वासन
रविवार को अफगान प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान की मांगों पर एक प्रारंभिक जवाब सौंपा, जिसके बाद दोपहर में कतर और तुर्किये के मध्यस्थों की मौजूदगी में एक और बैठक हुई। लेकिन गहन विचार-विमर्श के बाद भी अफगान पक्ष ने लिखित आश्वासन देने से इनकार कर दिया, जिससे वार्ता फिर गतिरोध में फंस गई।
कौन थे वार्ता में शामिल
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में आईएसआई, सैन्य अभियान निदेशालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। वहीं अफगानिस्तान की ओर से उप गृह मंत्री मौलवी रहमतुल्लाह नजीब के नेतृत्व में अनास हक्कानी, सुहैल शाहीन, नूरुर रहमान नुसरत और अब्दुल कहार बाल्खी ने भाग लिया।
दोनों देशों के बीच तनाव तब बढ़ा, जब काबुल में हुए धमाकों का आरोप अफगान सरकार ने पाकिस्तान पर लगाया। इसके बाद सीमा पर जवाबी हमलों और गोलाबारी की घटनाएं हुईं।
पहले 48 घंटे का संघर्ष विराम किया गया था, जो जल्द ही टूट गया। हालांकि कतर और तुर्किये की मध्यस्थता में हुआ दूसरा संघर्ष विराम अभी लागू है, परंतु हालिया घटनाओं से इसकी स्थिरता पर सवाल उठ गए हैं।
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