करूर भगदड़ मामले में दो पीड़ित परिवारों का आरोप: 'सीबीआई जांच के लिए अर्जी हमने नहीं दी, हस्ताक्षर धोखे से करवाए गए'
करूर/चेन्नई (आरएनआई): तमिलनाडु के करूर जिले में 27 सितंबर को हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत के मामले में दो पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की मांग बिना उनकी अनुमति के दाखिल कर दी गई। परिवारों का कहना है कि उन्होंने केवल मुआवजा और नौकरी के लिए कागजों पर साइन किया था, लेकिन बाद में पता चला कि उनकी ओर से सीबीआई जांच की अर्जी भी दायर कर दी गई।
एक पीड़िता शार्मिला ने बताया कि उनके नौ साल के बेटे की मौत हुई थी और उनके पति का नाम भी याचिका में शामिल किया गया था, जबकि वह परिवार को छोड़ चुके थे। दूसरे पीड़ित, पी. सेल्वराज ने कहा कि उन्होंने साइन कागजों को मुआवजा और नौकरी के लिए समझा, लेकिन बाद में देखा कि कोर्ट में उनकी ओर से सीबीआई जांच की मांग की गई।
तमिलनाडु डिजिटल पत्रकार संघ ने सुप्रीम कोर्ट को भेजे पत्र में कहा कि वीडियो इंटरव्यू से स्पष्ट है कि पीड़ितों को याचिकाओं की असलियत की जानकारी नहीं थी। संघ ने कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने, सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करने और जिम्मेदार वकीलों पर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
इस घटना के बाद तमिलनाडु में सुरक्षा और आयोजनों के प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। भगदड़ अभिनेता और नेता विजय की रैली के दौरान हुई थी, जिसमें भारी भीड़ नियंत्रण में नहीं रहने के कारण यह हादसा हुआ।
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