अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट की नसीहत: 'मुफ्त सलाहकारों की बाजार में कमी नहीं'

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर बाजार में कई मुफ्त सलाहकार मौजूद हैं। उन्हें नजरंदाज करते हुए दिशा-निर्देश सांविधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होने चाहिए, जो स्वतंत्रता और अधिकारों व कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करें। हम ऐसे दिशा-निर्देशों पर खुली बहस करेंगे।

Jul 16, 2025 - 09:51
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट की नसीहत: 'मुफ्त सलाहकारों की बाजार में कमी नहीं'

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी पर मंगलवार को अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मामले में बाजार में कई मुफ्त सलाहकार मौजूद हैं। कोर्ट ने ऑनलाइन सामग्री के नियमन के लिए प्रस्तावित तंत्र को सांविधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होने पर जोर दिया।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया समेत उन हास्य कलाकारों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जो अपने ऑनलाइन आचरण को लेकर कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। पीठ ने पहले संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर उचित प्रतिबंधों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए नियामक उपायों का आह्वान किया था। मंगलवार को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि प्रस्तावित दिशा-निर्देशों पर चर्चा करने की आवश्यकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि सभी हितधारक इस मुद्दे पर अपने विचार दे सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, बाजार में कई मुफ्त सलाहकार मौजूद हैं। उन्हें नजरंदाज करते हुए दिशा-निर्देश सांविधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होने चाहिए, जो स्वतंत्रता और अधिकारों व कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करें। हम ऐसे दिशा-निर्देशों पर खुली बहस करेंगे। कोर्ट ने कहा कि मान लीजिए कि अनुच्छेद 19 और 21 के बीच प्रतिस्पर्धा होती है तो अनुच्छेद 21 को अनुच्छेद 19 पर भारी पड़ना होगा।

शीर्ष अदालत यूट्यूबर और पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया की ओर से रैना के यूट्यूब शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के एक एपिसोड के दौरान की गई कथित अश्लील टिप्पणियों के संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अल्लाहबादिया की याचिका के साथ, क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका भी सूचीबद्ध थी, जिसमें समय रैना पर स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के महंगे इलाज को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। रैना पर एक दिव्यांग व्यक्ति का उपहास करने का भी आरोप है।


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