Dream11 समेत सट्टेबाजी ऐप्स पर बैन की तैयारी, संसद में पेश होगा बिल

कैबिनेट कमेटी ऑनलाइन गेमिंग बिल को अपनी मंजूरी दे दी और अब बुधवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। ऑनलाइन गेमिंग में बेटिंग को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। इसके तहत सात साल की कैद और 10 लाख तक के जुर्माने का प्रविधान होगा।

Aug 21, 2025 - 16:01
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Dream11 समेत सट्टेबाजी ऐप्स पर बैन की तैयारी, संसद में पेश होगा बिल

नई दिल्ली (आरएनआई)। केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंजूरी दे दी, जिसे बुधवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। इस विधेयक का उद्देश्य सट्टेबाजी और जुए से जुड़े ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाना और युवाओं को इनके नकारात्मक प्रभावों से बचाना है।

बिल के प्रावधानों के अनुसार, ऑनलाइन बेटिंग को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। इसके तहत सात साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होगा। क्रिकेट टीम बनाने वाले फैंटेसी स्पोर्ट्स एप ड्रीम11 जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी असर पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो गेम्स वित्तीय नुकसान, व्यसन, डेटा गोपनीयता उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे जोखिमों को बढ़ावा देते हैं, उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।

सट्टेबाजी से जुड़े ऐप्स का सेलिब्रिटी या सार्वजनिक हस्तियों द्वारा प्रचार-प्रसार करना भी प्रतिबंधित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम विशेष रूप से युवाओं को भ्रामक विज्ञापनों और प्रचार से बचाने के लिए उठाया गया है। गौरतलब है कि पिछले 4 से 5 सालों में 1400 से अधिक ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) समेत कई अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स पर मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी की जांच शुरू की थी। वहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी 1867 के सार्वजनिक जुआ अधिनियम को अप्रासंगिक बताते हुए नए कानून की आवश्यकता जताई थी।

प्रस्तावित बिल में ऑनलाइन गेमिंग को ‘गेम्स ऑफ स्किल’ और ‘गेम्स ऑफ चांस’ में बांटा जाएगा। गेम्स ऑफ स्किल जैसे फैंटेसी स्पोर्ट्स को वैध माना जाएगा, जबकि गेम्स ऑफ चांस यानी सट्टेबाजी और जुए आधारित गेम्स पर प्रतिबंध रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि कानून लागू करने में ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स और वीपीएन के इस्तेमाल जैसी तकनीकी चुनौतियां आएंगी। बावजूद इसके, सरकार का यह कदम ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने तथा युवाओं को व्यसन और धोखाधड़ी से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

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