यूएनएचआरसी में भारत का चुनाव वैश्विक भरोसे का प्रतीक: पीके मिश्रा बोले— लोकतांत्रिक ताकत और जनभागीदारी पर दुनिया की मुहर

Dec 11, 2025 - 11:11
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यूएनएचआरसी में भारत का चुनाव वैश्विक भरोसे का प्रतीक: पीके मिश्रा बोले— लोकतांत्रिक ताकत और जनभागीदारी पर दुनिया की मुहर

नई दिल्ली (आरएनआई) प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में भारत का चुना जाना देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, मजबूत शासन प्रणाली और समावेशी विकास मॉडल पर दुनिया के विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। वह 'नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एवरीडे एसेंशियल्स–पब्लिक सर्विसेज एंड डिग्निटी फॉर ऑल' को संबोधित कर रहे थे।

पीके मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनभागीदारी आधारित नीतियों ने शासन की पूरी संरचना को बदल दिया है। अब सरकारी योजनाएं केवल लागू नहीं होतीं, बल्कि नागरिकों की गरिमा, अधिकार और सहभागिता को केंद्र में रखते हुए आगे बढ़ती हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से आह्वान किया कि वह बदलते समय की जरूरतों के अनुसार नए ढांचे तैयार करे। मिश्रा ने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण न्याय, डेटा सुरक्षा, एल्गोरिदमिक निष्पक्षता, जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गिग वर्करों की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी जैसे उभरते मुद्दों को मानवाधिकार के नए आयाम बताया।

मानवाधिकार दिवस को भारत के लिए विशेष महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि संविधानिक आदर्श, लोकतांत्रिक संस्थाएं और सामाजिक मूल्य मिलकर देश में मानव गरिमा की रक्षा का मजबूत आधार बनाते हैं। उनके अनुसार सुशासन भी एक मौलिक अधिकार है, जिसमें पारदर्शिता, दक्षता, शिकायतों का त्वरित निपटारा और समय पर सेवाओं की उपलब्धता शामिल है।

पीके मिश्रा ने कहा कि भारत की सभ्यतागत सोच हमेशा मानव गरिमा, कर्तव्य, करुणा, सेवा, धर्म और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले शिक्षा का अधिकार, मनरेगा और खाद्य सुरक्षा जैसी अधिकार आधारित योजनाएं बनीं, लेकिन क्रियान्वयन की कमजोरियों के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए।

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने सैचुरेशन अप्रोच अपनाई, जिसमें हर पात्र व्यक्ति तक योजना पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। डिजिटल ढांचे, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और विकसित भारत संकल्प यात्रा जैसे अभियानों ने अधिकारों को वास्तव में लोगों तक पहुंचाया।

प्रधान सचिव ने बताया कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं, जिसकी पुष्टि 'हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे 2023–24' भी करता है। उन्होंने कहा कि गरीबी का अंत सबसे प्रभावी मानवाधिकार संरक्षण है और भारत यही मॉडल दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।

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