असम विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू, नेल्ली हत्याकांड की रिपोर्ट और 18 बड़े बिल होंगे पेश
गुवाहाटी (आरएनआई)। असम विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र मंगलवार से शुरू हो गया है। इस सत्र में 1983 के नेल्ली हत्याकांड की तेवारी और मेहता आयोग की रिपोर्ट सदन में रखी जाएंगी, हालांकि इन पर चर्चा नहीं होगी। इस हत्याकांड में दो हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी और लगभग तीन लाख लोग बेघर हो गए थे। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि यह सत्र असम में कई बड़े और परिवर्तनकारी बदलावों का आधार बनेगा।
सरकार सत्र में 18 अहम विधेयक पेश करने जा रही है, जिनमें एंटी-लव जिहाद, एंटी-पॉलीगैमी, भूमि और राजस्व संशोधन, तथा पशु क्रूरता रोकथाम से जुड़े विधेयक प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आयोगों की इन रिपोर्टों को विधानसभा सदस्यों और पुस्तकालय में उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन कार्यवाही में इन पर बहस या टेबलिंग नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि 1987 में रिपोर्टें सदन में प्रस्तुत तो की गई थीं, लेकिन मुद्रित प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गईं।
सत्र के पहले दिन ही गायक जुबीन गर्ग की मौत के मुद्दे पर सदन में हलचल दिखाई दी। विपक्ष के नेता देबबरत सैकिया और स्वतंत्र विधायक अखिल गोगोई ने इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव की मांग की। जैसे ही स्पीकर बिस्वजित दैमारी ने प्रस्ताव पर बोलना शुरू किया, मुख्यमंत्री सरमा ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है, इसलिए प्रस्ताव को अनुमति दी जानी चाहिए।
स्पीकर ने स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और निर्देश दिया कि चर्चा के दौरान ऐसी बयानबाजी न हो जो जांच को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि चर्चा समाप्त होने के बाद सरकार अपने बिल और अतिरिक्त अनुदान सदन में पेश करेगी। शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही असम में राजनीतिक और विधायी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण दौर शुरू हो गया है।
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