समुद्र में और मजबूत होगी भारत की ताकत, नौसेना में जल्द शामिल होगी परमाणु पनडुब्बी ‘अरिदमन’
नई दिल्ली (आरएनआई)। भारत अपनी समुद्री और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी में है। देश की तीसरी स्वदेश निर्मित परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ‘आईएनएस अरिदमन’ जल्द ही भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल की जाएगी। अरिदमन के जुड़ने के बाद भारत के पास पहली बार एक साथ तीन सक्रिय परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां उपलब्ध होंगी।
पानी के भीतर लगभग 44 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली यह पनडुब्बी दुश्मन की निगाहों से बचते हुए लंबे समय तक समुद्र में गश्त करने में सक्षम है। इसमें के-15 और के-4 जैसी शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात होंगी, जिनसे भारत की दूसरी प्रहार क्षमता और भी मजबूत हो जाएगी। ‘अरिदमन’ नाम का अर्थ है— शत्रु का संहार करने वाली, जो इसकी युद्ध क्षमता को दर्शाता है।
भारतीय नौसेना के पनडुब्बी बेड़े के साथ ही वायुसेना की ताकत में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमान शामिल होने के बाद नौसेना के लिए करीब 63,000 करोड़ रुपये की लागत से 26 राफेल-मरीन विमानों की खरीद का सौदा किया गया है। इनमें 22 सिंगल सीटर और 4 दो सीट वाले ट्रेनर विमान शामिल होंगे। यह विमान आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोतों पर तैनात किए जाएंगे।
इस समझौते में प्रशिक्षण, सिम्युलेटर, उन्नत हथियार प्रणालियाँ और पाँच वर्ष की रसद सहायता भी शामिल है। उम्मीद है कि सभी राफेल-मरीन विमान वर्ष 2029 तक नौसेना की संचालन क्षमता का हिस्सा बन जाएंगे।
भारत के बढ़ते रक्षा निवेश से स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में देश की समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा क्षमता एक नए मुकाम पर पहुंचेगी।
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