'सज्जन' को 'पदहीन' और 'सौभाग्य' को पद से 'शक्तिहीन' कर भाजपा संगठन ने बड़ा संदेश
भोपाल (आरएनआई) सज्जन' को 'पदहीन' और 'सौभाग्य' को पद से 'शक्तिहीन' कर भाजपा संगठन ने बड़ा संदेश दे दिया है। इस संदेश की मुद्दत से दरकार थी। 200 वाहनों के काफिले की "शक्ति" के साथ पद धारण करने पहुंचे मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह को सीएम हाउस ने आज एक आदेश जारी कर उनकी पदीय शक्ति पर रोक लगा दी। वहीं भिंड के किसान मोर्चा अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव को भी संगठन ने वाहनों के काफिले का प्रदर्शन करने पर पद से हटा दिया है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेरिका इजरायल ईरान युद्ध के चलते उत्पन्न हुए वैश्विक संकट के बीच भारत के नागरिकों से पेट्रोल, डीजल का कम उपयोग करने का आह्वान किया, साथ ही खुद के कारकेड में से वाहन भी कम कर दिए। इसी का अनुसरण विभिन्न भाजपा नेता कर रहे हैं। CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav ने भी जेड प्लस सुरक्षा होते हुए भी आवश्यक वाहन अपने काफिले से कम कर दिए हैं।
लेकिन बावजूद इसके सत्ता की हनक और अपनों से ही प्रतिस्पर्धा की भावना के चलते कई नेता मौका मिलते ही शक्ति प्रदर्शन के नाम पर वाहनों के काफिले निकालकर खुद को पार्टी के अन्य प्रतिस्पर्धी या प्रतिद्वंद्वी नेताओं से बड़ा बताने का अवसर नहीं चूक रहे। इस विकृति का सबसे अधिक नुकसान पार्टी संगठन को ही होना है। पेट्रोल डीजल का संकट न हो तब भी इस मनोविकृति पर रोक लगाना ही चाहिए।
भाजपा ने "पार्टी विद डिफरेंस" की भावना की साथ राजनीति ने पदार्पण किया था। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय से लेकर अटल आडवाणी के काल तक पार्टी अपने सिद्धांतों पर अटल रही। आज भी शीर्ष नेतृत्व अपने चाल चरित्र और चेहरे से पार्टी कार्यकर्ताओं को सादगी का संदेश देता है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal सादगी का उदाहरण हैं।
दूसरी ओर मौका मिलते ही दिखावा करने की मानसिकता वाले नेता हैं। जिन्हें पार्टी की कृपा से जरा सा झुनझुना मिल जाता है तो नहीं खुद को खुदा साबित करने के यत्न करने लगते हैं। दिखावे के तमाम हथकंडों में इसमें सबसे आसान गाड़ियों का जुलूस निकालना है। इससे न केवल यातायात में बाधा आती है बल्कि आम आदमी के मन में ऐसे नेताओं के प्रति धारणा भी खराब होती है।
पार्टी ने जिस तरह गाड़ियों के हुड़दंग पर लगाम लगाने का निर्णय लिया है, वैसे ही नेताओं के स्वागत में आए दिन होर्डिंग पोस्टर लगाकर शहरों को बदरंग करने और स्वागत के नाम पर ढकोसले करने की कुप्रथा पर भी सख्ती करना चाहिए। वाहनों पर हूटरों और पदनाम की पट्टियां लगाकर जनता में खुद को खलीफा दिखाने की आदत पर भी अंकुश लगाना चाहिए। ये सब चीजें जनता को पसंद नहीं आतीं। वैसे भी राजनीति यदि समाज सेवा है तो सेवकों का आचरण विनम्र, शालीन और अनुकरणीय दिखे भी।
मोदी जी ने नेताओं द्वारा लालबत्ती का उपयोग करने पर भी इसीलिए रोक लगाई थी कि वीआईपी कल्चर बंद हो। जैसे ऊंट पर बैठते ही सवार मटकने लगता है वैसे ही खुद को वीआईपी समझते ही आदमी बौराणी लगता है। BJP Madhya Pradesh के शीर्ष नेतृत्व के आज का निर्णय निश्चित ही सराहनीय है। इससे अनुशासनहीन लोगों को पूरा अनुशासन समझने में भले ही समय लगे परंतु "अनुशासन" का "अ" तो समझ में आ ही गया होगा।
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