ईरान संघर्ष से गहराया वैश्विक तेल संकट, मांग के मुकाबले कम होगी सप्लाई: आईईए की चेतावनी
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपनी ताजा “ऑयल मार्केट रिपोर्ट–मई 2026” में चेतावनी दी है कि अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई गंभीर दबाव में आ सकती है। एजेंसी के अनुसार, इस साल तेल उत्पादन पर संघर्ष का सीधा असर पड़ेगा और वैश्विक मांग के मुकाबले सप्लाई कम रहने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध शुरू होने के करीब दस सप्ताह बाद भी होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। टैंकरों की आवाजाही सीमित रहने से दुनिया के कई देशों में तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसी वजह से कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
आईईए के मुताबिक, खाड़ी देशों से होने वाली कुल सप्लाई में अब तक एक अरब बैरल से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। फिलहाल प्रतिदिन 1.4 करोड़ बैरल से अधिक तेल उत्पादन प्रभावित बताया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है।
तेल की कीमतों में भी लगातार अस्थिरता बनी हुई है। नॉर्थ सी डेटेड कच्चे तेल की कीमत एक समय 144 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। बाद में कीमतों में गिरावट आई और यह 100 डॉलर से नीचे पहुंची, लेकिन फिर दोबारा बढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर मिल रहे विरोधाभासी संकेत बाजार की अनिश्चितता को और बढ़ा रहे हैं। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और संघर्ष समाप्त करने को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। हालांकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल की तीसरी तिमाही से टैंकरों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है।
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