200 साल पुराना चंडी माता मंदिर: जहां आरती में प्रसाद लेने आते हैं भालू, आस्था और चमत्कार का अनोखा संगम
(रमाशंकर श्रीवास्तव)
महासमुंद,छत्तीसढ(आरएनआई)महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम घुंचापाली में स्थित प्राचीन चंडी माता मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है और आस्था व चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है। रायपुर से लगभग 95 किमी दूर पहाड़ियों के बीच स्थित इस मंदिर में माँ चंडी की प्राकृतिक रूप से निर्मित पत्थर की महा प्रतिमा विराजमान है, जिसकी ऊंचाई हर वर्ष बढ़ने की मान्यता है और वर्तमान में यह 23 फीट से अधिक हो चुकी है। ऐतिहासिक रूप से यह स्थल तंत्र साधना का केंद्र था जिसे वर्ष 1950-51 के आसपास आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।
चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहाँ भव्य मेला लगता है जहाँ देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। मंदिर का सबसे अनोखा पहलू है पिछले लगभग 15 वर्षों से शाम की आरती के समय प्रसाद ग्रहण करने आने वाला भालुओं का परिवार, जो आज तक किसी श्रद्धालु को नुकसान पहुँचाए बिना शांति से वापस जंगल लौट जाता है और इसी कारण मंदिर को 'Bear Temple' भी कहा जाता है। बागबाहरा से मंदिर की दूरी मात्र 4 किमी है।
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