रेल यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ावा: मथुरा-कोटा मार्ग पर 'स्वदेशी कवच' की शुरुआत, आपात स्थिति में करेगा अलर्ट
रेलवे हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च करता है। कवच 4.0 इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है, जो देश को आधुनिक रेलवे सुरक्षा की दिशा में तेजी से आगे ले जा रहा है। रेलवे की यह पहल देश को सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर बनाने की ओर एक और सशक्त कदम है।
नई दिल्ली (आरएनआई) रेलवे ने स्वदेशी रूप से विकसित की गई अत्याधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 को दिल्ली-मुंबई के व्यस्त मथुरा-कोटा खंड पर सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है। यह कदम रेलवे सुरक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
रेलवे हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च करता है। कवच 4.0 इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है, जो देश को आधुनिक रेलवे सुरक्षा की दिशा में तेजी से आगे ले जा रहा है। रेलवे की यह पहल देश को सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर बनाने की ओर एक और सशक्त कदम है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा 'कवच 4.0 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन की प्रेरणा से विकसित किया गया है। जहां अन्य देशों को ऐसी प्रणाली बनाने में 20-30 साल लगे, वहीं भारत ने यह उपलब्धि बहुत ही कम समय में हासिल की है।
कवच एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे हादसे रोकने और ट्रेन की गति नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। यह सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल 4 (एसआईएल-4) पर डिजाइन किया गया है, जो सुरक्षा के सबसे ऊंचे मानकों में आता है। 2015 में इसकी शुरुआत हुई और पहली बार 2018 में साउथ सेंट्रल रेलवे में लागू किया गया। ‘कवच 4.0’ को विकसित किया गया, जिसे मई 2025 में 160 किमी/घंटा की रफ्तार तक के लिए मंजूरी मिली।
कवच प्रणाली लोको पायलट को कोहरे जैसे कम दृश्यता के हालात में भी ट्रेन चलाने में मदद करेगी। सिग्नल की जानकारी सीधे केबिन में लगे डैशबोर्ड पर दिखेगी। जरूरत पड़ने पर ब्रेक अपने आप लग जाएगा, जिससे हादसे रुकेंगे।
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