महंत राजूदास का विवादित बयान, बोले - सनातन पर टिप्पणी करने वालों को जूता लेकर ठीक करें
अंबेडकरनगर (आरएनआई): अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजूदास ने शुक्रवार को अंबेडकरनगर जिले के छितूनी गांव (बनगांव रोड) में आयोजित रामलीला महोत्सव के उद्घाटन समारोह में संबोधन के दौरान सनातन धर्म पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर तीखा वक्तव्य दिया।
महंत राजूदास ने कहा कि “सनातन धर्म पर अनर्गल टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी संस्कृति सहिष्णु और सर्वसमावेशी है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि कोई भी व्यक्ति इसकी मर्यादाओं का अपमान करे।” उन्होंने कहा कि “जनप्रतिनिधियों को अपने वक्तव्यों में संयम और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए, क्योंकि समाज उनके आचरण से प्रेरणा लेता है।”
अपने संबोधन में महंत ने कहा कि रामचरितमानस जैसी पवित्र ग्रंथों की शिक्षाएं आज भी समाज को दिशा देती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “राम को वनवास हुआ तो लक्ष्मण और सीता ने भी उनका साथ नहीं छोड़ा। यह भारतीय संस्कृति की त्याग और समर्पण की भावना का प्रतीक है।”
महंत राजूदास ने आगे कहा कि “आज समाज में कुछ ऐसी घटनाएं हो रही हैं जो हमारे नैतिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। यदि लोग रामायण और रामचरितमानस का अध्ययन करें तो समाज की अनेक कुरीतियां स्वतः समाप्त हो सकती हैं।”
उन्होंने सभी धर्मप्रेमियों से आग्रह किया कि “धर्म की मर्यादा और परंपरा की रक्षा शालीनता और समझदारी के साथ करें।”
इस दौरान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। मंच से महंत ने रामलीला आयोजन समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि “ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में एकता, प्रेम और धर्म के प्रति आस्था बनी रहती है।”
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